भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 380, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 380

त्रिप्रश्नाधिकार ३५७ $\therefore$ क्रान्ति = १४°१२' सूर्य का सयन भोगांश ६ राशि से अधिक है, इसलिए यह दक्षिण क्रान्ति है । चर ज्या = स्परे अक्षांश $\times$ स्परे क्रान्ति = स्परे २५°२५' $\times$ स्परे १४°१२' = .४७५२ $\times$ .२५३० = .१२०२ $\because$ चरांश = ६°५४' $\because$ चर पल = ६१ पल = २७ मिनट ३६ सेकंड क्रान्ति दक्षिण है इसलिए धूपघड़ी में ६ बज कर २७ मिनट ३६* सेकंड पर प्रयाग में सूर्य का उदय होगा । परन्तु इस दिन काल समीकरण - १६ मिनट है । इसलिए सूर्योदय काल में प्रयाग का मध्यम काल = ६ बजकर २७ मिनट ३६ सेकंड - १६ मिनट = ६ बजकर ११ मिनट ३६ सेकंड प्रयाग के सूर्योदय काल में भारतवर्ष का मध्यम काल क्या होगा यह जानने के लिए २ मिनट १६ सेकंड और जोड़ना होगा क्योंकि प्रयाग २ मिनट १६ सेकंड पच्छिम है इसलिए यहाँ का मध्यम या स्पष्टकाल भारतवर्ष के मध्यम काल से इतना ही पीछे होगा, इसलिए प्रयाग में सूर्योदय के समय रेल की घड़ी में ६ बजकर १३ मिनट ३५ सेकंड हुआ रहेगा । सूर्योदय से मध्यम मध्यान्ह काल १२ घंटा - ६ घंटा १३ मिनट ३५ सेकंड अथवा ५ घंटा ४६ मिनट २५ सेकंड पर होता है और संध्या के ५ बजकर २४ मिनट तक ११ घंटा १० मिनट २५ सेकंड होता है । यह २७ घड़ी ५६ पल के समान है । इसलिए इष्टकाल में सूर्योदयोपरान्त २७ घड़ी ५६ पल है । यह मध्यम सावन काल है । इसको नाक्षत्र काल में बदल कर लग्न जानने में सुविधा होगी । ६ सावन घड़ी = ६ नाक्षत्र घड़ी + १ नाक्षत्र पल (पृष्ठ ३२६) $\because$ २८ सावन घड़ी = २८ नाक्षत्र घड़ी + ५ नाक्षत्र पल $\because$ २७ घड़ी ५६ पल (सावन) = २७ घड़ी ५६ पल + ५ पल (नाक्षत्र) = २८ घड़ी १ पल (नाक्षत्र)

  • वर्तन (Refraction of light) के कारण सूर्योदय इससे भी कुछ पहले होता है जिसकी चर्चा आगे की जायगी ।
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक) · पृष्ठ 380, कुल 838 में से · BharatKosha