सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५८ सूर्य-सिद्धान्त उदयकाल में सूर्य का निरयन भोगांश = ६^{रा} १५° २३.′ ३४″ = ६^{रा} १५° २४′ इसलिए उदयकाल में तुला राशि का १५° २४′ लग्न है । प्रयाग में तुला राशि का उदयकाल ५ घड़ी ४२ पल है । जब ३०° का उदय ५ घड़ी ४२ पल में होता है तब १५° ,, २ घड़ी ५१ पल में होगा और ३०′ ,, ५ पल ४२ वि० में होगा ६′ ,, १ पल ८ वि० में होगा ∴ १५° २४′ का उदय २ घड़ी ५५ पल ३४ वि० में होगा अर्थात् तुला का भुक्तकाल = २ घड़ी ५६ पल के लगभग ∴ तुला का भोग्यकाल = २ घड़ी ४६ पल के लगभग वृश्चिक का उदयकाल = ५ ,, ४४ ,, धनु का ,, ५ ,, १५ ,, मकर का ,, ४ ,, २५ ,, कुंभ का ,, ३ ,, ४८ ,, मीन का ,, ३ ,, ४१ ,, कुल का योग २५ ,, ३६ ,, अर्थात् सूर्योदय से २५ घड़ी ३६ पल तक मीन राशि का उदय हो चुका । इसलिए इष्टकाल में मेष राशि उदय हो रही है इसलिए यही उदय लग्न है । इसी को साधारणतः लग्न कहते हैं । यह जानने के लिए कि मेष राशि का कौन बिंदु लग्न है अनुपात से काम लेना चाहिये । इष्टकाल = २८ घड़ी १ पल मीन के अंत का उदयकाल २५ घड़ी ३६ पल मेष का भुक्तकाल = २ घड़ी २५ पल = १४२ पल मेष का उदयकाल = ४ घड़ी ४ पल = २४४ पल २४४ पल: १४२ पल :: ३० अंश: भुक्तांश ∴ भुक्तांश = (१४२ × ३०) / २४४ = १७° २७.′५ ∴ मेष का १७° २७.′५ लग्न है ।