भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार ३५६ उदाहरण ४—यदि प्रयाग में सूर्योदय काल के स्पष्ट सूर्य का निरयन भोगांश ६रा १५°२३' ३४" हो तो उस दिन उज्जैन में जिस समय सूर्य यामोत्तरवृत्त पर आवेगा उस समय भारतीय मध्यम काल क्या होगा ? उज्जैन ग्रीनविच से ७५°४६' पूर्व देशान्तर और २३°६' उत्तर अक्षांश पर है । प्रयाग का देशान्तर ८१°५५' १५" और उत्तर अक्षांश २५°२५' है । उज्जैन प्रयाग से ८१°५५' १५" - ७५°४६' = ६°९' १५" पच्छिम है। इसलिए उज्जैन का स्पष्ट मध्यान्ह प्रयाग के स्पष्ट मध्यान्ह से २४ मिनट ३७ सेकंड पीछे होगा । तीसरे उदाहरण में बतलाया गया है कि प्रयाग में धूपघड़ी के अनुसार ६ बजकर २७ मिनट ३६ सेकंड पर सूर्योदय होगा। इसलिए सूर्योदय के समय नतकाल = १२ घंटा - ६ घं० २७ मि० ३६ से० = ५ घंटा ३२ मि० २४ से० अर्थात् सूर्योदय के ५ घंटा ३२ मिनट २४ सेकंड उपरान्त स्पष्ट मध्यान्ह होगा। परन्तु सूर्योदय के समय भारतीय मध्यमकाल ६ घंटा १३ मिनट ३५ सेकंड होता है इसलिए प्रयाग में स्पष्ट मध्यान्ह के समय भारतीय मध्यकाल = ६ घंटा १३ मि० ३५ से० + ५ घं० ३२ मि० २४ से० = ११ घंटा ४५ मिनट ४६ सेकंड उज्जैन प्रयाग से २४ मिनट ३७ सेकंड पच्छिम है इसलिए यहाँ स्पष्ट मध्यान्ह प्रयाग के स्पष्ट मध्यान्ह से २४ मिनट ३७ सेकंड पीछे होगा। परन्तु प्रयाग के स्पष्ट मध्यान्ह के समय भारतीय मध्यम काल ११ घंटा ४५ मिनट ४६ सेकंड होता है, इसलिए उज्जैन के स्पष्ट मध्यान्ह के समय रेल की घड़ी में १२ बजकर १० मिनट २६ सेकंड हुआ रहेगा । पृष्ठ ८० की टिप्पणी में लिखा गया है कि किरणों के झुक जाने के कारण गणना के समय से सूर्योदय कुछ पहले हो जाता है। इसलिए यह बतलाना आवश्यक है कि किरणों का झुकना क्या है और इससे दिन के परिमाण में जो अन्तर पड़ जाता है उसका संशोधन कैसे करना चाहिये । वर्तन (REFRACTION OF LIGHT) हवा, जल, कांच, अभ्रक ऐसे पदार्थ हैं जिनमें प्रकाश घुसकर दूसरी ओर चला जाता है। इसलिए ये पारदर्शक (transparent) कहलाते हैं। जब प्रकाश एक समजातीय (homogeneous) पारदर्शक पदार्थ से दूसरे समजातीय पारदर्शक