सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविप्रश्नाधिकार ३६५ जाती है जिससे यह जान पड़ेगा कि वर्तन के कारण किसी तारे का नतांश कितना कम हो जाता है। यह सारिणी उस समय की है जिस समय वातावरण का दबाव ३० इंच ऊँचे पारे के दबाव के समान होता है और तापक्रम ५०° फारनहैट के समान होता है। इससे भिन्न अवस्था में कुछ अंतर हो जाता है।
| स्पष्ट नतांश | वर्तन | स्पष्ट नतांश | वर्तन | स्पष्ट नतांश | वर्तन |
|---|---|---|---|---|---|
| ०° | ०″ | ३५° | ४१″ | ७०° | २′ ३६″ |
| ५° | ५″ | ४०° | ४६″ | ७५° | ३′ ३४″ |
| १०° | १०″ | ४५° | ५८″ | ८०° | ५′ १६″ |
| १५° | १६″ | ५०° | १′ ६″ | ८५° | ९′ ५१″ |
| २०° | २१″ | ५५° | १′ २३″ | ८७° | १४′ २३″ |
| २५° | २७″ | ६०° | १′ ४१″ | ८८° | १८′ १६″ |
| ३०° | ३४″ | ६५° | २′ ४″ | ८८° ४०′ | २२′ २३″ |
| ९०° | ३५′ लगभग |
इस सारिणी से किसी तारे का यथार्थ नतांश सहज ही जाना जा सकता है। जैसे यदि किसी तारे का स्पष्ट नतांश ६०° हो तो इसका यथार्थ नतांश ६०° १′ ४१″ होगा। यह भी ध्यान देने की बात है कि जो तारा ठीक सिर के ऊपर (खस्वस्तिक पर) रहता है उसका स्पष्ट और यथार्थ स्थान एक ही होता है और यदि स्पष्ट नतांश ४५° से कम हो तो उसका वर्तन १′ से अधिक नहीं होता है। यदि स्पष्ट नतांश २०° से अधिक न हो तो प्रति १° नतांश के लिए १″ वर्तन होता है। वातावरण सम्बन्धी वर्तन की साधारण मीमांसा— सरलता के लिए यह समझ लेना अच्छा होगा कि पृथ्वी पूर्ण गोल है और वातावरण में नीचे से ऊपर तक पतले-पतले स्तर हैं जिनके केन्द्र भी वही हैं जो पृथ्वी