भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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३६६ सूर्य-सिद्धान्त का केन्द्र है । यह भी मान लेना चाहिए कि प्रत्येक स्तर का वर्तनाङ्क उस स्तर में सब जगह स्थिर है परन्तु एक स्तर का वर्तनाङ्क दूसरे स्तर के वर्तनाङ्क से भिन्न है । चित्र ६६ चित्र ६६ में ऐसे दो स्तरों हा हा ओर हि हि का सम्बन्ध दिखलाया जाता है । मान लो कि जब प्रकाश शून्य (aether) से हा हा में आता है तब इसका वर्तनाङ्क धा और जब प्रकाश शून्य से हि हि में आता है तब इसका वर्तनाङ्क धि होता है । मान लो कि हा हा में किरण की दिशा च छ है और हि हि में इसी किरण की दिशा छ ज हो जाती है । यदि भ पृथ्वी का केन्द्र हो और भ च = का, भ छ = कि, ∠ भ च छ = आ, ∠ भ छ ज = इ ओर ∠ स छ च = उ हो, तो पृष्ठ ३६३ के अनुसार ज्या उ / ज्या इ = धि / धा ∴ ज्या उ = ज्या इ × धि / धा परन्तु भ च छ त्रिभुज में ज्या उ / का = ज्या आ / कि ∴ ज्या उ = ज्या आ × का / कि