सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६४ सूर्य-सिद्धान्त और ज्या लि = त्र/क इसलिए ज्या लि = त्र/त ज्या ल यदि त को १ मान लिया जाय तो ज्या लि = त्र ज्या ल (७) इसका अर्थ यह हुआ कि यदि निरक्ष देशीय पृथ्वी की त्रिज्या १ मान ली जाय तो चन्द्रमा के निरक्ष देशीय क्षितिज लम्बन की ज्या को किसी स्थान की त्रिज्या से गुणा कर देने पर उस स्थान का क्षितिज लम्बन ज्ञात हो जायगा । उदाहरण २—यदि चंद्रमा का निरक्ष देशीय क्षितिज लंबन ५३' हो तो देहरादून में क्षितिज लम्बन क्या होगा ? ऊर्ध्व रेखा का कोण उदाहरण (१) में जान लिया गया है । इसलिए पहले देहरादून की त्रिज्या सूत्र (६) से जानना चाहिए :— त्र² = कोज्या अ / [कोज्या आ कोज्या (आ - अ)] = कोज्या ३०° १८' ५२" / [कोज्या ३०° ८' ४०" कोज्या १०' १२"] ∴ २ लरि त्र = लरि कोज्या ३०° १८' ५२" — लरि कोज्या ३०° ८' ४०" — लरि कोज्या १०' १२" = ६.६३६१ - .६.६३६६ - १० = १̅.६६६२ ∴ लरि त्र = १̅.६६६६ ∴ त्र = .६६६ ∴ देहरादून के क्षितिज लंबन की ज्या = .६६६ × ज्या ५३' = .६६६ × ०१५४ = .०१५३८ ∴ देहरादून का क्षितिज लंबन = ५२' ५६"*
- ऐसी सूक्ष्म गणना के लिए लघुरिक्थों की सारिणी कम से कम दशमलव के सात अंकों की होनी चाहिए नहीं तो बहुत स्थूलता रह जाती है ।