भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार ३६५ लम्बन के कारण आकाशीय पिण्ड के स्पष्ट और यथार्थ विषुवांशों में क्या अन्तर पड़ता है ? लंबन के सम्बन्ध में अब तक जो कुछ कहा गया है उससे स्पष्ट है कि इसके कारण आकाशीय पिंड के नतांश में अन्तर पड़ता है जिससे पिंड के विषुवांश, क्रान्ति, भोगांश और शर सब पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है। परन्तु जिस समय पिण्ड यामोत्तर वृत्त पर होता है उस समय लंबन के कारण नतांश में जो अन्तर पड़ता है उसका पूरा प्रभाव क्रान्ति पर ही पड़ता है न कि विषुवांश पर। परन्तु अन्य स्थानों में विषुवांश और क्रान्ति दोनों ही में अन्तर देख पड़ता है क्योंकि जिस ऊर्ध्व वृत्त पर नतांश का अन्तर होता है वह विषुवत् वृत्त से भिन्न होता है।

चित्र ७७

विषुवांश का लम्बन जानना मान लो कि उ ख द किसी स्थान का यामोत्तर वृत्त है, उ, द उस स्थान की क्षितिज उ अ द के उत्तर, दखिन विन्दु हैं, ख भूकेन्द्रिक खस्वस्तिक और ध उत्तरी आकाशीय ध्रुव है। मान लो कि चन्द्रमा का यथार्थ स्थान जो पृथ्वी के केन्द्र से देख पड़ता है च है और इसका स्पष्ट स्थान जो द्रष्टा को भूतल से देख पड़ता है चा है। च चा चन्द्रमा का नतांश लंबन है जिसके लिए पृष्ठ ३८३ में ला लिखा गया है। कोण ख ध च और ख ध चा च और चा के नतकाल (hour angle) हैं। इसलिए यह स्पष्ट है कि लंबन के कारण चन्द्रमा का यह स्पष्ट नतकाल, यथार्थ नतकाल से कोण च ध चा के समान अधिक है। यही कोण च ध चा चन्द्रमा का