सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४०६ सूर्य-सिद्धान्त जब त = ज्या लि कोज्या त्रा / कोज्या श यह स्पष्ट है कि सूत्र (क) में भी और लि बहुत छोटे हैं इसलिए इनकी ज्याओं की जगह धनु लिखने में कोई हानि नहीं होगी परन्तु सरलता हो जायगी । इसलिए भी = लि कोज्या त्रा ज्या व / कोज्या श (ख) अथवा यदि ग्रह का शर बहुत छोटा हो जैसे सूर्य-ग्रहण के समय चन्द्रमा का शर होता है तो कोज्या श का मान १ के प्रायः समान होगा । इसलिए भी = लि कोज्या त्रा ज्या व (ग) यही रूप सूर्य-सिद्धान्त के सूर्य-ग्रहणाधिकार श्लोक ७-८ में बतलाया गया है । शर लंबन या नति—यदि भु शर लंबन हो तो पृष्ठ ४०२ के समीकरण (क) की तरह ज्या भु = ज्या लि ज्या त्रा कोज्या श — ज्या लि कोज्या त्रा कोज्या (व + भी/२) ज्या श / कोज्या भी/२ (घ) यह स्पष्ट है कि भी/२ अर्थात् भोगांश लंबन बहुत छोटा है इसलिए कोज्या भी/२ = १ । ऐसी दशा में यदि व + भी/२ की जगह व और शा की जगह श रखा जाय तो बहुत अन्तर नहीं पड़ेगा और सूत्र (घ) सरल होकर ऐसा हो जायगा :— ज्या भु = ज्या लि ज्या त्रा कोज्या श — ज्या लि कोज्या त्रा ज्या श कोज्या व (ङ) यदि ज्या भु और ज्य लि की जगह इनके धनु लिये जायें क्योंकि यह बहुत छोटे हैं तो भु = लि ज्या त्रा कोज्या श — लि कोज्या त्रा ज्या श कोज्या व (च) भोगांश लंबन की समानता विषुवांश लंबन से तथा क्रान्ति लंबन की समानता शर लंबन से समझने के लिए यह याद रखना चाहिए कि भोगांश लम्बन के सूत्र में | विषुवांश लम्बन के सूत्र में लि = क्षितिज लम्बन | लि = क्षितिज लम्बन भी = भोगांश लम्बन | लि = विषुवांश लम्बन