सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमध्यमाधिकार २१
इनका स्थान जानने के लिए सबसे पहले यह जानना चाहिये कि सूर्य कहां है। सूर्य का स्थान जान लेने पर यह निश्चय हो जाता है कि बुध सूर्य से या तो २८¹ अंश के लगभग आगे होगा या पीछे और शुक्र सूर्य से या तो ४७² अंश के लगभग आगे होगा या पीछे । इसीलिए २६वें श्लोक में सूर्य, बुध और शुक्र का महायुगीय भगण समान बतलाया गया है। परन्तु यह जानने के लिए कि बुध या शुक्र सूर्य से कितना आगे या पीछे है बिना इनके शीघ्रों या शीघ्रोच्चों के स्थानों के जाने काम नहीं चल सकता । इनके शीघ्रोच्चों के भगण काल उस समय के समान हैं जितने समय में आजकल के मतानुसार बुध या शुक्र सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इसलिए बुध या शुक्र के शीघ्रोच्च के भगण काल से उस समय को समझना चाहिये जितने समय में यह नक्षत्र चक्र की परिक्रमा नहीं, वरन सूर्य की परिक्रमा करते हैं। मंगल, गुरु और शनि के शीघ्रोच्चों की बात उपर्युक्त दो ग्रहों के शीघ्रोच्चों से न्यारी है। इनके शीघ्रों का भगण काल वही माना गया है जो सूर्य का है। इसका अर्थ यह हुआ कि मंगल, गुरु और शनि के शीघ्रोच्च वह बिन्दु हैं जो १ वर्ष में पूरे नक्षत्र चक्र की परिक्रमा कर आते हैं। किन्तु सूर्य भी १ वर्ष में नक्षत्र चक्र की एक परिक्रमा कर लेता है; इसलिए मंगल, गुरु और शनि के शीघ्रोच्च सूर्य के पास ही रहते हैं। इन शीघ्रोच्चों के संबंध में दूसरे अध्याय में विशेष चर्चा की जायगी । मन्दोच्च अथवा उच्च— ऊपर बतलाया गया है कि चन्द्रमा का उच्च एक महायुग में ४,८८,२०३ भगण करता है, इसलिए एक भगणकाल सूर्य सिद्धान्त के मत से ३२३२ सावन दिन, ५ घड़ी, ३७ पल और १३.६ विपल होता है। चन्द्रमा का उच्च चन्द्रकक्षा का वह बिन्दु है जो पृथ्वी से चन्द्र-कक्षा के अन्य विन्दुओं की अपेक्षा सबसे अधिक दूरी पर है। जब चन्द्रमा इस विन्दु पर रहता है तब बहुत दूर होने के कारण आकार से अत्यन्त छोटा देख पड़ता है और गति भी बहुत मंद होती है। चन्द्र-कक्षा में चन्द्रोच्च से १८०° पर एक बिन्दु ऐसा भी है जो पृथ्वी के बहुत पास है। जब चन्द्रमा इस विन्दु पर आता है तब उसकी गति सबसे तीव्र हो जाती है और बहुत पास होने के कारण आकार भी बहुत बड़ा देख पड़ता है। चन्द्रमा की इस विषम गति के कारण यह सहज ही नहीं बतलाया जा सकता कि किसी समय उसका स्थान क्या होगा । ऊपर यह भी १. बुध का सूर्य से महत्तम अन्तर १६° १२' और २८° ४८' के बीच होता है। २. शुक्र का सूर्य से महत्तम अन्तर ४७° से अधिक नहीं होता । (Outlines of Astronomy by Herschel pp. 281 and 291)