सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ सूर्य सिद्धान्त बतलाया गया है कि चन्द्रमा का भगण काल २७.३२१६७ मध्यम सावन दिन का होता है। इससे चन्द्रमा का जो स्थान निकलता है वह मध्यम स्थान कहलाता है। इस मध्यम-स्थान से चन्द्रमा कभी कुछ आगे और कभी कुछ पीछे देख पड़ता है। चन्द्रमा प्रत्यक्ष जिस स्थान पर देखा जाता है उसको स्पष्ट स्थान कहते हैं। मध्यम स्थान से स्पष्ट स्थान का सबसे अधिक अन्तर ५°२′ ३०″ होता है। इतने कोण की जो ज्या (sine) होती है उसी के समान अन्तर पर पृथ्वी से चन्द्र-कक्षा का केन्द्र माना गया है और चन्द्रमा इसी केन्द्र की परिक्रमा करता हुआ पृथ्वी के चारों ओर घूमता हुआ देख पड़ता है। चित्र २ में प पृथ्वी का केन्द्र है, च चन्द्र-कक्षा का केन्द्र है और पच चित्र २ चित्र ३ चित्र ४ ५°२′ ३०″ की ज्या है। चन्द्रमा उ चा नी वृत्त पर घूमता हुआ पृथ्वी की परिक्रमा करता है। यह स्पष्ट है कि जब चन्द्रमा उ पर होता है तब वह प से अत्यन्त अधिक दूरी पर रहता है और जब नी पर रहता है तब अत्यन्त निकट रहता है। उ को चन्द्रोच्च (apogee) तथा नी को नीच (perigee) कहते हैं। यह उ बिन्दु