भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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२२ सूर्य-सिद्धान्त स छ² = स घ² - घ छ² और स च² = स ख² - ख च² स च और स छ की जानकारी हो जाने पर इन दोनों का अन्तर निकाल लेने से हमको च छ का ज्ञान हो जाता है। इससे च छ की दूरी मीलों में भी मालूम हो सकती है क्योंकि यदि दोनों त्रिभुज द शु दा और च शु छ सजातीय (Similar) समझ लिये जायें तो च छ शु छ ------ = ------ द दा शु द परन्तु शु छ और शु द का सम्बन्ध हमें केपलर के नियमों से मालूम है क्योंकि शु छ शुक्र से सूर्य की दूरी है और शु द शुक्र से पृथ्वी की दूरी है। इसलिए यदि शु छ ७२३ और शु द २७७ हो तो च छ ७२३ ------ = ------ द दा २७७ द दा पृथ्वी तल के दो स्थान हैं इसलिए इनकी परस्पर दूरी सहज ही जानी जा सकती है। इस प्रकार च छ का परिमाण मीलों में भी जाना जा सकता है। परन्तु उपर्युक्त रीति से च छ का परिमाण विकलाओं में भी जाना जा सकता है। इसलिए जब इसका परिमाण विकलाओं और मीलों दोनों में मालूम है तब यह सहज ही जाना जा सकता है कि सूर्य पृथ्वी से कितनी दूर है क्योंकि च छ का विकलात्मक मान च छ का मान मीलों में --------------------- = ---------------------- २०६२६५ पृथ्वी से सूर्य की दूरी २०६२६५ × च छ का मान मीलों में ∴ पृथ्वी से सूर्य की दूरी = --------------------------------- च छ का मान विकलाओं में इससे सूर्य का लंबन सहज ही जाना जा सकता है। हैली (Hally) ने १७७३ वि० में इस रीति का आविष्कार किया था। इन दोनों रीतियों में यह दोष है कि शुक्र और सूर्य के बिम्बों के भीतरी स्पर्श का समय ठीक-ठीक वेध करना बड़ा कठिन होता है। शुक्र की गति इतनी मन्द होती है और सूर्य के बिम्ब का किनारा इतना अस्पष्ट होता है कि स्पर्शकाल के समय में कई असुओं का अन्तर पड़ सकता है। क्षितिज लम्बन जानकर सूर्य और चन्द्रमा की दूरी जानना—यह बतलाया गया है कि क्षितिज लंबन की ज्या = त्र ÷ क, जहाँ त्र पृथ्वी की त्रिज्या और क भूकेन्द्र से ग्रह की दूरी है।