भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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४२४ सूर्य-सिद्धान्त सूर्य का अर्द्धव्यास १६' और लम्बन ८".८ है, इसलिए सूर्य की त्रिज्या १६' ९६० ──────── = ──── = ─── = १०६ पृथ्वी की त्रिज्या ८".८ ८.८ ∴ सूर्य की त्रिज्या = १०६ × पृथ्वी की त्रिज्या = १०६ × ३९६३.३ मील = ४३१६६६.७ मील = ४३२००० मील चन्द्रमा का अर्द्धव्यास १५' ३६".६ और लम्बन ५७' १".८ है ज्या १५' ३६".६ इसलिए चंद्रमा की त्रिज्या = पृथ्वी की त्रिज्या × ────────── ज्या ५७' १".८ १५' ३६".६ = पृथ्वी की त्रिज्या × ──────── ५७' १".८ = ३९६३.३ × .२७५ = १०८६.६ = १०९० मील चित्र ८४ में ∠ प भ च = चंद्रमा का कोणात्मक अर्द्धव्यास ∠ भ च द = चंद्रमा का लम्बन प च = चंद्रमा की त्रिज्या भ द = पृथ्वी की त्रिज्या वार्षिक लम्बन वार्षिक लम्बन—यह बतलाया गया है कि तारे हमसे इतनी दूर हैं कि भूतल के किसी दो स्थानों से देखने पर इनके लम्बन का पता नहीं लग सकता। परन्तु यदि पूरे वर्ष भर तक किसी तारे का वेध किया जाय तो पृथ्वी की वार्षिक- गति के कारण एक ही द्रष्टा से स्थानों में बहुत अंतर पड़ता जाता है जिससे देख पड़ता है कि तारे में भी कुछ लम्बन होता है। यह अभी सिद्ध हुआ है कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी ६,३०,००००० मील के लगभग है। यह विदित ही है कि पृथ्वी एक वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करती है। इस लिए ६ मास में पृथ्वी आधा परिक्रमा करती है। अब यदि किसी तारे का वेध किसी दिन किया जाय और फिर ६ महीने के बाद उसी तारे का वेध किया जाय तो द्रष्टा के स्थानों का अन्तर १८,६०,००,००० मील हो जाता है जिससे तारे की दिशा में कुछ परिवर्तन देख पड़ता है। यह परिवर्तन लम्बन के कारण होता है। जब द्रष्टा के