सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४६ सूर्य-सिद्धान्त = ५८' १०" - १६' १३" = ४१' ५७" । यह गणितसिद्ध छाया की त्रिज्या है। वातावरण के कारण छाया का १/५० गुना बढ़ जाता है। इसलिए कुल छाया = ४१' ५७" + (४१' ५७"/५०) = ४१' ५७" + ५०" = ४२' ४७" यह प्रकट है कि चन्द्रकक्षा में भूभाद्वं (पृथ्वी की छाया की त्रिज्या) का परिमाण सदैव एकसा नहीं रहता क्योंकि यह सूर्य और चन्द्रमा के लंबन तथा सूर्य की कोणात्मक त्रिज्या पर अवलंबित है और यह तीनों बातें पृथ्वी से सूर्य और चन्द्रमा की दूरियों पर अवलंबित हैं जो सदैव घटा बढ़ा करती हैं। अब यह बतलाया जायगा कि इस विषय पर सूर्य-सिद्धान्त का क्या मत है। सूर्य और चन्द्र बिम्बों का मध्यम व्यास तथा चन्द्रकक्षा में सूर्य का स्पष्ट व्यास— सार्धानि षट् सहस्राणि योजनानि विवस्वतः । विष्कम्भो मण्डलस्येन्दोः साशीतिस्तु चतुश्शती ॥१॥ स्वभ्यासौ त्रिज्याऽभ्यस्तौ स्वमन्दश्रवणोद्धृतौ । स्पष्टौ स्वको स्वकौ भूमेस्तथा सूची शशाङ्कवत् ॥२॥ स्फुटस्वभुक्तिगुणितो मध्यभुक्त्या हृतो स्वकौ । रवेस्स्वभगणाभ्यस्तः शशाङ्कभगणोद्धृतः ॥३॥ अनुवाद—(१) सूर्य के मण्डल का मध्यम व्यास ६५०० योजन और चंद्रमा के मण्डल का मध्यम व्यास ४८० योजन है। (२) जिस समय किसी का स्पष्ट व्यास जानना हो तो उसके मध्यम व्यास को उस समय की उसकी स्पष्टगति से गुणा कर दो और गुणनफल को उसकी मध्यमगति से भाग दे दो। सूर्य के स्पष्ट व्यास को सूर्य के महायुगीय भगण से गुणा करके गुणनफल को चन्द्रमा के महायुगीय भगण से भाग देने पर (३) अथवा सूर्य के स्पष्ट व्यास को चन्द्रकक्षा से गुणा करके और गुणनफल को सूर्य की कक्षा से भाग देने पर जो आता है वही चन्द्रकक्षा में सूर्य के स्पष्ट व्यास का परिमाण है। चन्द्रकक्षा में सूर्य और चन्द्रमा के व्यास को १५ से भाग देने पर सूर्य और चन्द्रमा के व्यास कलाओं में ज्ञात हो जाते हैं। विज्ञान भाष्य—इन तीन श्लोकों का सार यह है— सूर्य बिम्ब का मध्यम व्यास = ६५०० योजन चन्द्र बिम्ब का मध्यम व्यास = ४८० योजन