सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४५६ सूर्य-सिद्धान्त परन्तु भ चा और भ च पृथ्वी से स्पष्ट और मध्यम चन्द्रमा की दूरियां हैं और यह बताया गया है कि कोणीय वेग कर्ण के वर्ग के प्रतिलोम के अनुसार बदलता है (देखो स्पष्टाधिकार पृष्ठ ८८) इसलिए स्थूल रूप से यह माना जा सकता है कि कोणीय वेग कर्ण के भी प्रतिलोम के अनुसार बदलता है जैसा कि सूर्य-सिद्धान्त के नियम से प्रकट होता है । इसलिए भ चा / भ च = चंद्रमा की मध्यम गति / चंद्रमा की स्पष्ट गति = म / स ∵ म / स = का घा / क घ = प फ / क घ ∴ क घ = प फ × स / म = भू व्यास × स्पष्टगति / मध्यम गति इसी क घ का नाम श्लोक ४ में सूची रखा गया है । समजातीय त्रिभुज भ का खा और भ क ख इत्यादि से सिद्ध हो सकता है कि भ चा / भ च = का खा / क ख = गा घा / ग घ = का खा + गा घा / क ख + ग घ ...(२) समीकरण (१) और (२) में प का और भ चा समान हैं इसलिए प ध × का खा + गा घा / त ध - प फ = भ च × का खा + गा घ / क ख + ग घ या प थ / भ च = त ध - प फ / क ख + ग घ परन्तु प थ या भ र पृथ्वी से सूर्य की मध्यम दूरी और भ च पृथ्वी से चन्द्रमा की मध्यम दूरी है जिनका अनुपात = ४३३१५०० / ३२४००० = १३·३७ क्योंकि सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार ४३३१५०० योजन सूर्य की कक्षा और ३२४००० योजन चन्द्रमा की कक्षा के विस्तार हैं, तथा ६५०० / ४८० = १३·५४, सूर्य और चन्द्रमा के मध्यम व्यासों का अनुपात है जो १३·३७ के प्रायः समान है। इसलिए यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं कि प थ / भ च = ६५०० / ४८० = सूर्य का मध्यम व्यास / चन्द्रमा का मध्यम व्यास ∴ ६५०० / ४८० = तध - प फ / क ख + ग घ