सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
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चन्द्रग्रहणाधिकार ४५६ प्रकट है कि जब अमावस्या या पूर्णमासी के समय सूर्य के भोगांश के समान ही या इसके लगभग राहु या केतु किसी का भोगांश हो तभी ग्रहण लग सकता है अन्यथा नहीं । यह बात चित्र ६८ से अच्छी तरह स्पष्ट हो जायगी :- चित्र ६८ पूर्णिमान्त काल में :- छा = पृथ्वी की छाया का केन्द्र च = चन्द्रमा का केन्द्र च छा या श = चन्द्रमा का शर (विक्षेप) म = भूछाया और चन्द्रमा के व्यासार्धों का योग प = चंद्रमा का पात च क या चा = चन्द्रमा की प्रति घड़ी भोगांश गति क ख या शा = " " " शर की गति छ छा या रा = भूछाया अथवा सूर्य की प्रतिघड़ी भोगांश गति