भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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चन्द्रग्रहणाधिकार ४६१ ∵ स्पर्श काल = ३ घड़ी २३ पल - ४ घड़ी २० पल = - ५७ पल अर्थात् मध्य रात्रि से ५७ पल पहले ग्रहण का स्पर्श होगा । सम्मीलन काल = ३ घड़ी २३ पल - ५२ पल = २ घड़ी ३१ पल अर्थात् मध्य रात्रि के २ घड़ी ३१ पल उपरान्त सर्वग्रास ग्रहण का आरंभ होगा अथवा पूरा चन्द्रबिम्ब छाया में प्रवेश हो जायगा । इसी प्रकार उन्मीलन काल = ३ घड़ी २३ पल + ५२ पल = ४ घड़ी १५ पल, मध्यरात्रि के उपरान्त और मोक्ष काल = ३ घड़ी २३ पल + ४ घड़ी २० पल = ७ घड़ी ४३ पल, मध्य रात्रि के उपरान्त यह समय उज्जैन का मध्य काल है अर्थात् उज्जैन में मध्यम मध्य रात्रि से ५७ पल पहले ग्रहण का स्पर्श, २ घड़ी ३१ पल उपरान्त सम्मीलन, ४ घड़ी १५ पल उपरान्त उन्मीलन और ७ घड़ी ४३ पल उपरान्त मोक्ष होंगे। किसी अन्य स्थान में किस समय स्पर्श सम्मीलन इत्यादि होगा, यह जानने के लिए उस स्थान का देशान्तर काल मध्यमाधिकार श्लोक ६३, ६४ के आधार पर जोड़ना चाहिए यदि स्थान उज्जैन से पूर्व हो और घटाना चाहिए यदि स्थान उज्जैन से पच्छिम हो । ऐसा करने से उस स्थान के मध्यम काल के अनुसार स्पर्श काल, सम्मीलन काल इत्यादि ज्ञात होंगे । यदि यह जानना हो कि उस स्थान में सूर्योदय से कितनी घड़ी पल उपरान्त स्पर्श, सम्मीलन इत्यादि होगा तो मध्यम काल में काल समीकरण का संस्कार करके स्पष्ट काल निकालना होगा और उस दिन की सूर्य की क्रान्ति निकाल कर चर काल का भी संस्कार करना होगा । इस दिन का काल-समीकरण- सूर्य का मध्यम भोगांश = प्रायः ४ राशि = १२०° अयनांश = लगभग २२°४०′ ∴ सूर्य का सायन भोगांश = १४२°४०′ इसलिए त्रिप्रश्नाधिकार पृष्ठ ३४७ के सूत्र (८) अथवा पृ० ३५० के सूत्र (क) के अनुसार काल समीकरण सहज ही निकाला जा सकता है । सूत्र (क) के अनुसार, काल-समीकरण = ११५.१६५ ज्या (१४२°४०′ + ७८°२४′)

  • १४७.६६५ ज्या (२ × १४२°४०′) = ११५.२ ज्या (१८०° + ४१°४′) - १४८ ज्या १८५°२०′