भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 517

४८२ सूर्य-सिद्धान्त = - ११५.२ ज्या ४१°४' - १४८ ज्या (३६०° - ७४°४०') = - ११५.२ × .६५७ + १४८ × ज्या ७४°४०' = - ११५.२ × .६५७ + १४८ × .६६४४ = - ७५.७ + १४२.७ = ६७ असु = + ११ पल धन का चिह्न यह प्रकट करता है कि इस दिन के किसी स्पष्ट काल में ११ पल जोड़ने से जो आता है वही उस समय का मध्यक काल है। इसलिए इस दिन जब धूप घड़ी के अनुसार रात के १२ बजेंगे तब मध्यम घड़ी में १२ बजकर ११ पल हुआ रहेगा । प्रातःकाल की सूर्य की क्रान्ति - मध्य रात्रि के सूर्य का स्पष्ट भोगांश ३ रा २८°३०'.७ अथवा ३ रा २८°३१' है। परन्तु मध्यम प्रातः काल ६ बजे माना जाता है इसलिए मध्यम प्रातः काल के ४५ घड़ी उपरान्त मध्य रात्रि होती है। सूर्य की स्पष्ट दैनिक गति ५७'.५ है। इसलिए ४५ घड़ी में इसकी गति ४३' के लगभग होती है। इस प्रकार उदयकाल में सूर्य का भोगांश ३ रा २८°३१ - ४३' = ३ रा २७°४८' इसमें अयनांश २२°४०' जोड़ा तो आया ४ रा २०°२८'। यही सूर्य का उदयकालिक सायन भोगांश है। इसलिए पृष्ठ ३०६ के अनुसार सूर्य की उदयकालिक क्रान्ति ज्या = ज्या ४ रा २०°२८' × .३६७६ = ज्या ३६°३२' × .३६७६ = .६३३६ × .३६७६ = .२५२१ ∵ सूर्य की उदयकालिक क्रान्ति = १४°३६' काशी का अक्षांश २५°२०' है। इसलिए इस दिन काशी में उदयकालिक सूर्य की चरज्या = स्परे १४°३६' × स्परे २५°२०' = .२६०५ × .४७३४ = .१२३३ ∴ चरांश = ७°५' ∴ चरकाल = ७१ पल यह धनात्मक है क्योंकि क्रान्ति उत्तर है।