सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्द्रग्रहणाधिकार ४६६ इसी प्रकार चन्द्रमा के शर की भी गणना करनी चाहिए जैसा कि चित्र ६८ के सम्बन्ध में बतलाया गया है। ऐसा करने से गणना का विस्तार बहुत हो जायगा इसलिए वह नहीं दिखलाया जाता । स्पर्श काल और मोक्ष काल के स्फुट वलनों की गणना— स्फुट वलन के लिए आक्षवलन और अयन वलन का जानना आवश्यक है । आक्षवलन के लिए चन्द्रमा की तात्कालिक क्रान्ति और नतकाल जानना चाहिए। क्रान्ति की गणना— ऊपर बतलाया गया है कि स्थित्यर्ध ४ घड़ी ४२ पल है जिसमें चन्द्रमा १°४′२८″ अथवा १°४′·५ चलता है क्योंकि चन्द्रमा की दैनिक गति ८२३′ है। पूर्णिमान्त कालिक चन्द्र भोगांश २६८°३४′ स्थित्यर्ध में चन्द्रमा की गति १°४′·५ ∴ स्पर्शकालिक चन्द्र भोगांश २६७°२६′·५ और मोक्षकालिक चन्द्र भोगांश २६९°३८′·५ राहु का भोगांश दोनों कालों में १२०°११′·५ ∴ स्पर्श काल में राहु से चन्द्रमा का अन्तर १७७°१८′ मोक्ष काल में राहु से चन्द्रमा का अन्तर १७६°२७′ स्पर्शकालिक चन्द्र शर ज्या = ज्या ५°६′ ज्या १७७°१८′ / ३४३८ = ज्या ५°६′ ज्या २°४२′ / ३४३८ = ३०६ × १६२ / ३४ = १४′·६ ∴ स्पर्शकालिक चन्द्र शर = १४′·६ मोक्षकालिक चन्द्र शर ज्या = ज्या ५°६′ ज्या १७६°२७′ / ३४३८ = ३०६ × ३३ / ३४३८ = ३′. ∴ मोक्षकालिक चन्द्र शर = ३′