सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५१८ सूर्य-सिद्धान्त $= ८^रा; २५^\circ; ४६^\prime\cdot ६५३ - २^\circ ३३^\prime\cdot ४६\cdot ८$ $= ८^रा; २३^\circ; १६^\prime\cdot १८५$ स्पष्ट सूर्य और चन्द्रमा से प्रकट है कि बुधवार की मध्य रात्रि को चन्द्रमा सूर्य से ७ अंश के लगभग पच्छिम है इसलिये अमांवस्या अगले दिन होगी। यह जानने के लिये कि अमावस्या कब होगी, चन्द्रमा की स्पष्ट गति जाननी चाहिये। चतुर्दशी की मध्यरात्रि का मध्यम चन्द्र $= ८^रा; २५^\circ; ४६^\prime ६५३$ दैनिक मध्यमगति $\quad\quad\quad = १३^\circ १०^\prime\cdot ५८३$ अमावस्या की मध्यरात्रि का मध्यम चंद्र $= ९^रा; ९^\circ; ०^\prime\cdot २३६$ चतुर्दशी की मध्यरात्रि का चन्द्रोच्च $= ३^रा\quad २६^\circ; ६^\prime\cdot ११६$ एक दिन की गति $\quad\quad\quad\quad ६^\prime\cdot ६८३$ अमावस्या की मध्यरात्रि का चन्द्रोच्च $= ३^रा; २६^\circ; १५^\prime\cdot ७६६$ $\because$ अमावस्या की मध्यरात्रि का चन्द्र मन्द केन्द्र $= ३^रा; २६^\circ १५^\prime\cdot ७६६ - ९^रा ९^\circ; ०^\prime\cdot २३६$ $= ६^रा; १७^\circ १५^\prime\cdot ५६३$ $= २ पाद + १७^\circ १५^\prime\cdot ६$ $\therefore$ तीसरे पाद का गत भाग $= १७^\circ १५^\prime\cdot ६ = १०३५^\prime\cdot ६$ $\therefore$ चन्द्रमा की स्फुट मन्द परिधि $= ३२^\circ - २०^\prime \times \frac{भुज ज्या १०३५\cdot ६}{३४३८}$ $= ३२^\circ - २०^\prime \times \frac{१०१६\cdot ६}{३४३८}$ $= ३२^\circ - ६^\prime$ $= १६१४^\prime$ $\therefore$ भुजफल $= १६१४ \times \frac{१०१६\cdot ६}{२१६००} = ६०^\prime\cdot ३४८ = १^\circ ३०^\prime\cdot ३४८$ $\therefore$ मन्दफल $= १^\circ ३०^\prime\cdot ३४८$ $\therefore$ अमावस्या की मध्यरात्रि का स्पष्ट चन्द्रमा $= ९^रा ९^\circ ०^\prime\cdot २३६ - १^\circ ३०^\prime\cdot ३४८$ $= ९^रा ७^\circ २६^\prime\cdot ८८८$ $\therefore$ चन्द्रमा की स्पष्ट दैनिक गति $= ९^रा ७^\circ २६^\prime\cdot ८८८ - ८^रा २३^\circ १६^\prime\cdot १८५$ $= १४^\circ १३^\prime\cdot ७०३ = ८५३^\prime\cdot ७०३$