सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्यग्रहणाधिकार ५१७ ∵ भुजफल = ८३६ × ७३० / २१६०० = २८'·२५४ यही सूर्य का मन्द फल है। यह धनात्मक है क्योंकि मन्द केन्द्र अजादि है (देखो पृष्ठ १५४) । इसलिये बुधवार को मध्यरात्रि का स्पष्ट सूर्य = ८ रा २९° ३३'·१४४ + २८'·२५४ = ९ रा ०° १'·३६८ सूर्य की स्पष्ट दैनिक गति * = ५६' ८" + (८३६ × २१६ × ५६'·८) / (२१६०० × २२५) = ५६' ८" + २' १३"·६ = ६१' २१"·६ = ६१'·३६ चन्द्रमा का मंद केन्द्र = चन्द्र मन्दोच्च — मध्यम चन्द्र = ३ रा २६° ६'·११६ — ८ रा २५° ४६'·६५३ = ७ रा ०° १६'·४६३ = २ पाद + १ रा ०° १६'·४६३ = २ पाद + ३०° १६'·४६३ ∵ तीसरे पाद का गत भाग = ३०° १६'·४६ = १८१६'·५ चन्द्रमा की स्फुट मन्द-परिधि = ३२° — २०' × भुज ज्या १८१६'·५ / ३४३८ = ३२° — २०' × १७३५·५५ / ३४३८ = ३२° — १०' ३१° ५०' = १९१०' ∵ भुजफल = १९१० × १७३५·५५ / २१६०० = १५३'·४६८ = २° ३३'·४६८ यही चंद्रमा का मन्दफल है। यह ऋणात्मक है क्योंकि चन्द्र-केन्द्र तुलादि है। इसलिये बुधवार की मध्यरात्रि का स्पष्ट चन्द्रमा
- देखो पृष्ठ १५७