भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 55

३२ सूर्य सिद्धान्त मनुदस्त्रास्तु भौजस्य बौधस्याष्टाऽष्टसागराः । कृताद्रिचन्द्रा जैवस्य त्रिलाङ्काश्व भृगोस्तथा ॥४३॥ शनिपातस्य भगणाः कल्पे यमरसर्तवः । भगणाः पूर्वमेवाऽत्र प्रोक्ताः चन्द्रोच्चपातयोः ॥४४॥ अनुवाद—(४१) पूर्व की ओर चलते हुए एक कल्प में सूर्य का मन्दोच्च ३८७ भगण, मङ्गल का मन्दोच्च २०४ भगण, बुध का मन्दोच्च ३६८ भगण, (४२) वृहस्पति का मन्दोच्च ६०० भगण, शुक्र का मन्दोच्च ५३५ भगण और शनि का मन्दोच्च ३६ भगण करता है । पातों की गति पश्चिम की ओर को होती है । एक कल्प में मङ्गल का पात २१४ भगण, बुध का पात ४८८ भगण, वृहस्पति का पात १७४ भगण, शुक्र का पात ६०३ भगण और (४४) शनि का पात ६६२ भगण करता है । चन्द्रमा के उच्च और पात के भगणों की संख्या पहले (३३वें श्लोक में) बतलायी जा चुकी है । विज्ञान भाष्य—ग्रहों के मन्दोच्चों और पातों की गति बहुत सूक्ष्म होती है । इनमें से कोई भी १ महायुग में १ पूरा चक्कर नहीं कर पाते, इसलिए इनकी संख्या कल्प के अनुसार दी गयी है । मन्दोच्च और पात किसे कहते हैं इसका विवेचन चन्द्रमा के उच्च और पात के साथ किया गया है। यह संस्थाएँ कैसे जानी गयीं, इसका स्पष्ट प्रमाण कहीं नहीं मिलता; परंतु इसमें संदेह नहीं कि इसकी जानकारी बहुत काल के पर्यवेक्षण से की गयी होगी। कुछ पाश्चात्य विद्वान कहते हैं कि इसका ज्ञान भारतीय ज्योतिषियों को यूनानियों से हुआ होगा; परंतु यह उनका भ्रम है जैसा कि नीचे की सारिणी से जान पड़ेगा । यहाँ यह बतला देना आवश्यक है कि इन भगणों की संख्या आजकल के सूक्ष्मयंत्रों से जाने गये अंकों से बहुत भिन्न है । आधुनिक ग्रन्थों में इन मन्दोच्चों और पातों की वार्षिक गति दी हुई है; इसलिए सूर्य सिद्धान्त के कल्पीय भगणों से वार्षिक गति का मान निकाल कर तुलना की जा सकती है । वार्षिक गति इस प्रकार निकाली गयी :—कल्प में जितने भगण होते हैं उसको कल्प के सौर-वर्ष से भाग दे दिया गया तो भगण की एक भिन्न संख्या प्राप्त हुई । इसको ३६० से गुणा करने पर अंश, अंश को ६० से गुणा करने पर कला और कला को ६० से गुणा करने पर विकला में वार्षिक गति निकल आयी । जैसे सूर्य-मन्दोच्च एक कल्प में ३८७ भगण करता है तो एक वर्ष में वह ३८७ X ३६० X ६० X ६० / ४३२००००००० विकला अर्थात् ११६१ / १०००० विकला अर्थात् ॰११६१ विकला चलेगा ।