भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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सूर्यग्रहणाधिकार ५३३ $\because$ सूर्योदय से लंबन-संस्कृत-अमावस्यान्त काल = १५ घड़ी ४८.६ पल अर्थात् लंबन के कारण चन्द्रमा सूर्य के सामने सूर्योदय से १५ घड़ी ४८.६ पल पर आवेगा। यह भी बिल्कुल शुद्ध नहीं है, इसलिए असकृत्कर्म करना आवश्यक है अर्थात् अब यह देखना चाहिए कि सूर्योदय से १५ घड़ी ४८.६ पल पर क्या लंबन होता है। इस काल के लिए इस समय का उदय लग्न, त्रिभोन लग्न, मध्य लग्न इत्यादि जानना चाहिए जिसके लिए वही क्रिया फिर दुहरानी पड़ेगी जो पृष्ठ ५२८ से अब तक दिखलाई गई है। १५ घड़ी ४८.६ प ल ( सावन ) = १५ घड़ी ५१.१ पल ( नाक्षत्र ) सूर्योदय का विषुव काल = ५० घड़ी ५५.७ पल ( पृष्ठ ५२८ ) $\because$ लंबन-संस्कृत-अमावस्यान्त के समय विषुव काल = ६ घड़ी ४६.८ पल = ४०°४१′ के लगभग पृष्ठ ५२६ के समीकरणों में ३४°१६ की जगह ४०°४१′ रख कर सरल करने से इस समय की उदय लग्न और अग्रा आ जायगी क्योंकि और गुणक सामान्य हैं। इसलिए लरि स्परे १/२ ( व का + का पू ) = लरि कोज्या ४५°५६′.५ + लरि स्परे २०°२०′.५ - लरि कोज्या ६६°२३′.५ = ६̄.८४२२ + ६̄.५६६१ - ६̄.५४६४ = ६̄.८६४६ $\because$ व का + का पू / २ = ३६°१४′ व का + का पू = ७२°२८′...................................(३) लरि स्परे १/२ ( व का - का पू ) = लरि ज्या ४५°५६′.५ + लरि स्परे २०°२०′.५ - लरि ज्या ६६°२३′.५ = ६̄.८५६५ - ६̄.५६६१ - ६̄.६७१३ = ६̄.४५४३ $\because$ व का - का पू / २ = १५°५३′ $\because$ व का - का पू = ३१°४६′...................................(४) समीकरण (३) और (४) से, व का = ५२°७′ का पू = २०°२१′

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