सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५३२ सूर्य-सिद्धान्त से ख वि का मान सीधे ही निकालना उचित होगा। यहाँ ख वि वित्रिभ लग्न या त्रिभोन लग्न का नतांश है, म ख मध्य लग्न का नतांश है और म वि मध्य लग्न और त्रिभोन लग्न का अन्तर है जो ३१४°४३′ - ३०२°३′ अथवा १२°४०′ के समान है और $\angle$ म वि ख = ९०°, इसलिए नेपियर के दूसरे नियम के अनुसार, कोज्या म ख = कोज्या ख वि + कोज्या म वि $\because$ कोज्या ख वि = $\frac{कोज्या म ख}{कोज्या म वि}$ = $\frac{कोज्या ४५^\circ३′}{कोज्या १२^\circ४०′}$ $\therefore$ लरि कोज्या ख वि = लरि कोज्या ४५°३′ - लरि कोज्या १२°४०′ = ६̅.८४६१ - ६̅.६८६३ = ६̅.८५६८ $\therefore$ ख वि = ४३°३६′ $\therefore$ त्रिभोन लग्न का नतांश = ४३°३६′ यह जानने की दूसरी रीति भी है जो उसी गोलीय त्रिभुज के $\angle$ म वि ख और म ख की सहायता से नेपियर के दूसरे नियम पर आश्रित है। दोनों रीतियों से त्रिभोन लग्न का नतांश अभिन्न होता है। इसलिए सूर्य-सिद्धान्त के पृष्ठ ४१३ में बतलायी गयी रीति की अपेक्षा यही मान्य होनी चाहिए। दृक्क्षेप = त्रिभोन लग्न की नतांश ज्या = ज्या ४३°३६′ = .६८६६ दृग्गति = त्रिभोन लग्न की उन्नतांश ज्या = कोज्या ४३°३६′ = .७२४२ छेद = $\frac{१}{४ दृग्गति}$ = $\frac{१}{४ \times .७२४२}$ अमान्तकालिक त्रिभोन लग्न = ३१४°४३′ (पृष्ठ ५३०) अमान्तकालिक सायन सूर्य = २६३°१४′ (पृष्ठ ५२४) $\therefore$ अमान्त कालिक विश्लेषांश = २१°२६′ $\therefore$ सूर्य या चन्द्रमा का लंबन = $\frac{ज्या विश्लेषांश}{छेद}$ = ४ $\times$ .७२४२ $\times$ ज्या २१°२६′ = ४ $\times$ .७२४२ $\times$ .३६६२ = १.०६०८ घड़ी = १ घड़ी ३.६५ पल यह पच्छिम लम्बन है क्योंकि त्रिभोन लग्न से सूर्य पच्छिम है। इसलिए इसको अमावश्यान्त काल में जोड़ने पर भोगांश-लंबन-संस्कृत-अमावश्यान्त काल आवेगा। सूर्योदय से अमावश्यान्त का समय = १४ घड़ी ४५ पल पच्छिम भोगांश लंबन = १ घड़ी ३.६ पल