सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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५४४ सूर्य-सिद्धान्त = ४०·०२ चन्द्रशर उत्तर = ७'·६ ∴ नति संस्कृति चन्द्रशर = ३२'·४२ मानैक्यखंड = १६'·६८ + १६'·२६ = ३२'·६७ ∴ ग्रास का परिमाण = ३२'·६७ - ३२'·४२ = ०'·५५ इस प्रकार यह सिद्ध हुआ कि यदि राहु, चन्द्रमा और सूर्य के व्यास, लंबन और नति नवीन गणनानुसार लिये जाँय तो ग्रास १ कला से भी कम होता है जो उद्योग करने पर भी नहीं देखा जा सकता है। यही बात अनुभव से भी सिद्ध होती है। इसलिए ग्रहण की गणना के लिए हमें अपने सिद्धान्त ग्रंथों में दृग्गणित के अनुसार सुधार करना अत्यन्त आवश्यक है। सूर्य-ग्रहणाधिकार का विज्ञान भाष्य समाप्त ।