भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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५५४ सूर्य-सिद्धान्त (२) चन्द्रग्रहण के समय जब चन्द्रमा चा पर और भू छाया छ पर हो - चन्द्र शर उत्तर \ भू छाया का केन्द्र छ चन्द्रमा के दक्षिण स्फुटवलन उत्तर / विन्दु द से पूर्व की ओर (३) सूर्य ग्रहण के समय जब चन्द्रमा च पर और सूर्य छ पर हो— चन्द्र शर दक्षिण \ चन्द्रमा का केन्द्र च सूर्य विम्ब के स्फुटवलन उत्तर / दक्षिण विन्दु द से पूर्व की ओर (४) सूर्यग्रहण के समय जब चन्द्रमा धा पर और सूर्य छ पर हो— चन्द्र शर उत्तर | चन्द्र का केन्द्र चा सूर्य विम्ब के उत्तर स्फुटवलन उत्तर | विन्दु उ से पच्छिम की ओर इसी प्रकार यदि प्रत्येक विम्ब के केन्द्र से जाने वाली क्रा क्रा रेखा पू प रेखा के पू विन्दु से दक्षिण की ओर खींची जाय तो स्फुट वलन की दिशा दक्खिन की ओर होगी । इस दशा में भी यह स्पष्ट हो जायगा कि श्लोक ६ का नियम बिलकुल ठीक उतरता है । चित्र खींचते समय इस बात का ध्यान रहना आवश्यक है कि छ से च वा च को जाने वाली रेखा क्रान्तिवृत्त से समकोण पर अथवा कदम्बप्रोत वृत्त पर हो । श्लोक १०—जब श्लोक ६ के अनुसार मध्य ग्रहण काल का वलनाग्र विन्दु जान लिया जाय तब केवल यह जानना रह जाता है कि इस वलनाग्र विन्दु से ग्राह्य विम्ब के केन्द्र तक जाने वाली रेखा के किस विन्दु पर ग्राहक का केन्द्र है। यह तो प्रत्यक्ष ही है कि मध्य ग्रहण काल में ग्राह्य और ग्राहक विम्बों के केन्द्रों का अन्तर चन्द्रमा के शर के समान होता है । इसलिये ग्राह्य विम्ब के केन्द्र से वलनाग्र विन्दु की दिशा में चन्द्रशर के अन्तर पर ग्राहक का केन्द्र नाप कर स्थिर कर लेना चाहिए । श्लोक ११—ग्राहक के इसी केन्द्र पर ग्राहक विम्ब के व्यासार्ध से जो वृत्त खींचा जायगा वही ग्राहक का विम्ब सूचित करेगा । यह वृत्त ग्राह्य विम्ब का जितना भाग ढक लेगा वही विम्ब का ग्रस्त भाग होगा । यदि ग्राह्य का पूरा विम्ब ग्राहक वृत्त से ढक जायगा तो सर्वग्रास ग्रहण लगेगा, नहीं तो खंडग्रास ग्रहण होगा । इसकी उपपत्ति पृष्ठ ४६१ के चित्र ६६ के सम्बन्ध में बतलायी जा चुकी है । श्लोक १२—इस श्लोक में यह बतलाया गया है कि समतल भूमि पर अथवा काठ या किसी अन्य वस्तु की तख्ती पर परिलेख खींचा जा सकता है । फलक की जगह काग़ज़ भी आजकल सुगमता से प्रयोग किया जा सकता है ।