भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 578, कुल 838 में से

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परिलेखाधिकार ५५३ चित्र नं० १०२ छ = भू छाया या सूर्य विम्ब का केन्द्र । च = चन्द्र विम्ब का केन्द्र जब चन्द्रशर दक्षिण है । चा = चन्द्र विम्ब का केन्द्र जब चन्द्रशर उत्तर है । पू = उस विम्ब का पूर्व विन्दु जिसकी परिधि पर यह अक्षर है । प = उस विम्ब का पच्छिम विन्दु जिसकी परिधि पर यह अक्षर है । उ = उस विम्ब का उत्तर विन्दु जिसकी परिधि पर यह अक्षर है । द = उस विम्ब का दक्षिण विन्दु जिसकी परिधि पर यह अक्षर है । क्राक्रा = क्रान्तिवृत्त कक = कदम्बप्रोत वृत्त क्रिक्रि या क्रिक्री चन्द्रमा के केन्द्र से जाता हुआ क्रान्तिवृत्त के समानान्तर वृत्त इस चित्र में स्फुटवलन उत्तर की ओर दिखलाया गया है । इसलिए प्रत्येक विम्ब के केन्द्र से जाती हुई पू प रेखा के पू विन्दु से क्रान्तिवृत्त क्र क्रा उत्तर की ओर है । इस चित्र से नीचे लिखी बातें स्वयंसिद्ध हैं :— (१) चन्द्र ग्रहण के समय जब चन्द्रमा च पर और भू छाया छ पर हो— चन्द्र शर दक्षिण \quad \Big} \quad भू छाया का केन्द्र छ चन्द्रमा के उत्तर विन्दु स्फुटवलन उत्तर \quad \Big} \quad उ से पच्छिम की ओर

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