सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिलेखाधिकार ५६३ ∵ ख उ ग = ३२° ३१' ∴ मध्यकालिक चन्द्रमा के समप्रोतवृत्त का नतांश = ३२° ३१' ∴ ज्या (आक्षवलन) = ज्या ३२° ३१' × ज्या २५° २०' / कोज्या १४° १६'·५ = ·५३७५ × ·४२७६ / ·९६६१ = ·२३०० / ·९६६१ = ·२३७३ ∴ आक्षवलन = १३° ४४' दक्षिण, क्योंकि चन्द्रमा पच्छिम कपाल में है। मध्यग्रहणकालिक चन्द्रमा का सायन भोगांश = ३२१° १४' इसमें ६०° जोड़ने पर चन्द्रमा का सायन भोगांश = ५१° १४' जिसकी क्रान्ति उत्तर होगी इसलिए आयनवलन उत्तर होगा। ज्या (आयनवलन) = ज्या २३° २७' × ज्या ५१° १४' / कोज्या १४° १६'·५ = ·३९७६ × ·७७६७ / ·९६६१ = ·३१०२ / ·९६६१ = ·३२०१ ∴ आयनवलन = १८° ४०' उत्तर इसलिए मध्यग्रहणकालिक स्फुटवलन = १३° ४४' दक्षिण + १८° ४०' उत्तर = ४° ५६' उत्तर इसलिए स्पर्श, मध्य और मोक्षकाल के परिलेख के आवश्यक अङ्क यह हुए :- स्पर्शकाल सम्बन्धी— स्फुटवलन = १६° १०' उत्तर (पृष्ठ ५०४) ∵ ज्या १६° १०' = ११२८'' = ११२८ / ७० = १६ अंगुल चन्द्रशर = १४'·६ उत्तर (पृष्ठ ५००) = १४·६ / ३ अंगुल = ४·८७ अंगुल