सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहयुत्यधिकार ५७७ की ओर जा रहे हों तो समझना चाहिए कि दोनों का समागम इष्टकाल के पहले ही हो चुका है। परन्तु यदि शीघ्र गति वाले ग्रह का भोगांश मन्दगति वाले ग्रह के भोगांश से कम हो तो समझना चाहिए कि समागम अभी होनेवाला है। परन्तु यदि दोनों ग्रह वक्री हों अर्थात् पच्छिम की ओर जा रहे हों तो ऊपर जो कुछ कहा गया है उसके विपरीत समझना चाहिए अर्थात् शीघ्रगति वाले ग्रह का भोगांश अधिक हो तो समझना चाहिए कि समागम होने वाला है और यदि कम हो तो समझना चाहिये कि समागम हो चुका है। (३) यदि एक ग्रह मार्गी और दूसरा वक्री हो तो और यदि मार्गी ग्रह का भोगांश वक्री ग्रह के भोगांश से अधिक हो तो इष्ट काल से पहले ही समागम हो चुका है परन्तु यदि वक्री ग्रह का भोगांश अधिक हो तो समझना चाहिए कि समागम होने वाला है। विज्ञान भाष्य—मान लीजिए दिये हुए चित्र में मे मेष का आदि विन्दु है और क, ख दो ग्रह हैं। यह स्पष्ट है कि उस का भोगांश क के भोगांश से अधिक है। यदि ख कि गति क की गति से अधिक हो तो यह प्रकट है कि ख क से और दूर होता जायगा और इन दोनों का समागम अतीत हो गया है। परन्तु यदि ख की गति मन्द
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