भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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परिलेखाधिकार ५८५ क = कदम्ब घ = धृ व ख = खस्वस्तिक म = मध्यलग्न ग, घ = दो ग्रहों के स्थान (चित्र में घ की जगह ध बन गया है) क ग य घ = कदम्बवृत्त ल ज फ य च प म = क्रान्तिवृत्त ख = क्रान्तिवृत्त का वह बिन्दु जो पूर्व क्षितिज में लग्न हैं। अ य छ रा = य बिन्दु का अहोरात्रवृत्त ध च छ घ = घ ग्रह पर जाता हुआ ध्रुवप्रोतवृत्त ध ग फ = ग ग्रह पर जाता हुआ ध्रुवप्रोतवृत्त उ ज घ = घ ग्रह पर जाता हुआ समप्रोतवृत्त उ ग प = ग ग्रह पर जाता हुआ समप्रोतवृत्त ज = घ ग्रह के समप्रोत वृत्त और क्रान्तिवृत्त का सम्पात बिन्दु प = ग ग्रह के समप्रोतवृत्त और क्रान्तिवृत्त का सम्पात बिन्दु प ज = दोनों ग्रह के समप्रोत वृत्तों का अन्तर (क्रान्ति वृत्त पर) च ज = घ ग्रह का आक्षदृक्कर्म (घ ग्रह के समप्रोत और ध्रुवप्रोत वृत्तों का क्रान्तिवृत्त पर अंतर) च य = घ ग्रह का आयन दृक्कर्म (घ ग्रह के कदम्बप्रोत और ध्रुवप्रोत वृत्तों का क्रान्तिवृत्त पर अंतर) य ज = घ ग्रह का आक्ष-आयन-दृक्कर्म-संस्कृत फल, अर्थात् घ ग्रह के समप्रोत और कदम्बप्रोत वृत्तों का क्रान्ति वृत्त पर अंतर प फ = ग ग्रह का आक्षदृक्कर्म (ग ग्रह के समप्रोत और ध्रुवप्रोत वृत्तों का क्रान्तिवृत्त पर अंतर) प फ = ग ग्रह का आयनदृक्कर्म (ग ग्रह के कदम्बप्रोत और ध्रुवप्रोत वृत्तों का क्रान्तिवृत्त पर अंतर) प य = ग ग्रह का आक्ष-आयन-दृक्कर्म-संस्कृत फल अर्थात् ग ग्रह के समप्रोत और कदम्बप्रोत वृत्तों का क्रान्तिवृत्त पर अन्तर य प = प फ - य फ और य ज = च ज - च य वृत्त एक में मिले रहते हैं। इस कारण वहां प फ या च ज का मान शून्य होता है अर्थात् वहां आक्षदृक्कर्म शून्य होता है। जैसे-जैसे अक्षांश बढ़ता है अर्थात् जैसे-जैसे १०