सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 620, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहयुत्यधिकार ५६५ भाग दे देना चाहिए। यह नियम चित्र १०८ के गोलीय समकोण त्रिभुज ग गा च से स्पष्ट है। क्योंकि ग्रह के भोगांश में ६०° जोड़ने से जो आता है उसकी क्रान्ति अयनवलन के समान होती है (देखो चन्द्रग्रहणाधिकार श्लोक २५) जो यहाँ ग गा च कोण के समान है इसलिए उसकी क्रान्ति-कोटिज्या अयनबलन-कोटिज्या के समान होगी। यदि गा ग च त्रिभुज समतल समकोण त्रिभुज मान लिया जाय तो ∠ गा ग च = ६०° - ∠ ग गा च = ६०° - आयनवलन ज्या ग गा ज्या गा च ज्या गा च ∵ ————————————— = ———————————————— = —————————————————— ज्या ∠ ग च गा ज्या ∠ गा ग च ज्या ६०°—आयनवलन ज्या ग गा × ज्या (६०° - आयनवलन) ∴ ज्या गा च = ———————————————————————————————— ज्या ६०° ज्या मध्यम शर × ज्या (६०° - आयनवलन) = ———————————————————————————————————— त्रिज्या मध्यम शर ज्या × अयनवलन कोटिज्या = ————————————————————————————————— त्रिज्या ग्रहों के विम्बमान— कुजार्किज्ञामरेज्यानां त्रिंशत्सार्धार्धवर्धिता । विष्कम्भश्चन्द्रकक्ष्यायां भृगोष्षष्टिरुदाहृतः ॥१३॥ चित्रतुःकर्णयोगाप्तास्ते द्विघ्नास्त्रिज्यया हताः । स्फुटाः स्वकर्णास्तिथ्याप्ता भवेयुर्मानलिप्तिकाः ॥१४॥ अनुवाद—(१३) मंगल, शनि, बुध, गुरु और शुक्र के बिम्बों के व्यास चन्द्रकक्षा में क्रमानुसार ३०, ३७।।, ४५, ५२।। और ६० योजन हैं । (१४) किसी ग्रह के बिम्ब का स्पष्ट व्यास जानने के लिए उस ग्रह के ऊपर लिखे हुए व्यास के दुगुने को त्रिज्या (३४३८) से गुणा करके गुणनफल को त्रिज्या और उस ग्रह के चतुर्थ शीघ्रकर्ण के योग से भाग देने से जो लब्धि आती है वही बिम्ब का स्पष्ट व्यास होता है। यदि इसको १५ से भाग दे दिया जाय तो कलाओं में बिम्ब का परिमाण मालूम हो जाता है। विज्ञान भाष्य—१३वें श्लोक में यह बतलाया गया है कि ग्रहों के बिम्बों के व्यास चन्द्रकक्षा में क्या हैं। इसके आधार पर चन्द्रग्रहणाधिकार के श्लोक १-३ के अनुसार यह विलोम रीति से जाना जा सकता है कि अपनी कक्षा में ग्रह के बिम्ब का व्यास क्या है। परन्तु युति के सम्बन्ध में यह जानने की कोई आवश्यकता नहीं होती। यहाँ तो केवल यह जानना चाहिए कि युतिकाल में ग्रहबिम्ब का कलात्मक