भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 623

५६८ सूर्य-सिद्धान्त आचार्य केतकर की ज्योतिर्गणित के अनुसार पंचतारा ग्रहों के बिम्बों के लघुतम और परम मान तथा लघुतम और परम लम्बन त्रिप्रश्नाधिकार के पृष्ठ ४१० में

ग्रहस्पष्ट बिम्बशीघ्र कर्ण
लघुतमपरमपरमलघुतम
विकलाविकला
मंगल४.४२१.२२५२४५२४
बुध४.८१०.६१३८७६१३
गुरु३१.६४६.७६२०३४२०३
शुक्र९.६६०.०१७२३२७७
शनि१५.८१६.५१०५३६८५३६
  • यह बड़े हर्ष की बात है कि आचार्य वेङ्कटेश बापू केतकर अभी जीवित हैं और अपने सुपुत्र के साथ बीजापुर में रहते हैं और पिता पुत्र दोनों ज्योतिष के अध्ययन में अभी तक लगे हुए हैं। मैंने भूल से आपके नाम के पहले पृष्ठ १८६ में आपको 'स्वर्गीय' लिख दिया था क्योंकि मैं समझता था कि आप स्वर्गीय हो गये होंगे । परन्तु श्रीमान् पदम एस० एम० गोड्रेज Padam S. M. codrez के पत्रों से मालूम हुआ कि आप अभी जीवित हैं। इस सूचना के लिए मैं इन महाशय का बड़ा कृतज्ञ हूँ । पूना के महाराष्ट्रीय पंचांगैक्य मंडल के १८८२ वि० के प्रथम अधिवेशन के वृत्तान्त से सिद्ध होता है कि आप वृद्ध होते हुए भी ज्योतिष संबंधी वाद विवादों में सम्मिलित होते हैं । लेखक