भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 622

ग्रहयुत्यधिकार ५६७ अब यह प्रकट है कि जब १३वें श्लोक में दिये हुए बिम्बों के परिमाण ही अशुद्ध हैं तब इन्हीं के आधार पर अगले श्लोक के अनुसार स्पष्ट बिम्ब के परिमाण ठीक-ठीक कैसे जाने जा सकते हैं। अब यह विचार किया जायगा कि अगला श्लोक कहाँ तक शुद्ध है। इस श्लोक की प्रथम पंक्ति का सार यह है :— मध्यम बिम्ब × २ × त्रिज्या स्पष्ट बिम्ब = ----------------------------------- त्रिज्या + चतुर्थ शीघ्रकर्ण मध्य बिम्ब × त्रिज्या अथवा स्पष्ट बिम्ब = ---------------------------- त्रिज्या + चतुर्थ शीघ्रकर्ण

२ इसको त्रैराशिक के रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है :— त्रिज्या + चतुर्थ शीघ्रकर्ण --------------------------- : त्रिज्या : : मध्यबिम्ब : स्पष्ट बिम्ब २ नियम के इस रूप से सिद्ध होता है कि हमारे आचार्य को यह बात अच्छी तरह मालूम थी कि जब त्रिज्या की दूरी पर ग्रह बिम्ब अपने मध्यम मान के समान होता है तब इससे अधिक दूरी पर स्पष्ट बिम्ब का मान कम होगा और कम दूरी पर स्पष्ट बिम्ब का मान अधिक होगा जैसा कि स्पष्टाधिकार पृष्ठ ८५ में दिखलाया गया है। परन्तु त्रिज्या को ३४३८ मानने से काम नहीं चल सकता। यदि त्रिज्या की जगह वह दूरी रखी जाय जो चन्द्रमा से पृथ्वी की दूरी है और त्रिज्या + चतुर्थ शीघ्रकर्ण --------------------------- की जगह वह दूरी रखी जाय जो इष्टकाल में पृथ्वी से २ इष्ट ग्रह की दूरी है तो यह अनुपात ठीक हो सकता है। कोई कोई आचार्य इस त्रैराशिक के पहले पद में त्रिज्या की जगह तृतीय कर्ण लेते हैं। परन्तु इससे भी उतनी शुद्धता नहीं आ सकती जैसी आनी चाहिये। पृथ्वी से किसी ग्रह की दूरी इष्टकाल में क्या होती है इसकी गणना करने के लिये पहले यह जानना होता है कि सूर्य से उस ग्रह की दूरी स्पष्टाधिकार के पृष्ठ १७६-८० में दिये हुए सूत्र के अनुसार क्या है। फिर उसी अधिकार के पृष्ठ १८३ में दिये हुए चित्र के अनुसारं पृथ्वी से उस ग्रह की दूरी अर्थात् शीघ्र कर्ण जानना चाहिये। अब यदि ८६ पृष्ठ में दिये हुए मध्यबिम्ब को पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से गुणा करके इसी शीघ्र कर्ण से भाग दिया जाय तो ग्रह का स्पष्ट बिम्ब शुद्धतापूर्वक जाना जा सकता है।