भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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६२२ सूर्य-सिद्धान्त दिये गये हैं वे ध्रुवाभिमुख हैं इसलिए इनमें केवल आक्षदृक्कर्म का संस्कार करने की आवश्यकता पड़ती है । इस प्रकार ग्रह और नक्षत्र के भोगों में किसी इष्टकाल में जो अंतर होता है उसको ग्रह की दैनिक गति से भाग देने पर यह जाना जाता है कि कितने समय में ग्रह का नक्षत्र से योग होगा या होने वाला है । और सब बातें ग्रहयुत्यधिकार में बतलाये गये नियम के अनुसार ही समझनी चाहिए । यहाँ सुगमता यह है कि नक्षत्र स्थिर होते हैं इसलिए केवल एक ग्रह के सम्बन्ध की गणना करनी पड़ती है । नक्षत्रों के योगतारों के पहचानने की रीति— फल्गुन्योः भाद्रपदयोः तथैवाऽऽषाढयोर्द्वयोः । विशाखाश्विनिसौम्यानां योगतारा तथोत्तरा ॥१६॥ पश्चिमोत्तरतारा या द्वितीया पश्चिमे स्थिता । हस्तस्य योगताराऽसौ श्रविष्ठायाश्च पश्चिमा ॥१७॥ ज्येष्ठाश्रवणमैत्राणां बार्हस्पत्यस्य मध्यमा । भरण्याग्नेयपित्र्याणां रेवत्याश्चापि दक्षिणा ॥१८॥ रोहिण्यादित्यमूलानां प्राची सार्पस्य चैव हि । यथाप्रधानं शेषाणां स्थूलास्स्युर्ध्रुवतारकाः ॥१९॥ पूर्वस्यां ब्रह्महृदयादंशकैः पञ्चभिः स्थितः । प्रजापतिर्वृषान्तेऽसौ सौम्ये अष्टात्रिंशदंशकैः ॥२०॥ अपांवत्सस्तु चित्राया उत्तरेऽशंश्च पञ्चभिः । बृहत्किञ्चिदतो भागैरापष्षड्भिस्तथोत्तरे ॥२१॥ इत्यष्टमोध्याय : अनुवाद—(१६) पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वाभाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़, विशाखा, अश्विनी और मृगशिरा नक्षत्रों में से प्रत्येक नक्षत्र का उत्तरवाला तारा उस नक्षत्र का योग तारा है । (१६) हस्तनक्षत्र के पश्चिमोत्तर दिशा में जो दो तारे हैं । उनमें दूसरा पच्छिमवाला तारा इस नक्षत्र का योगतारा है और धनिष्ठा नक्षत्र के दो उत्तरवाले तारों में भी पच्छिमवाला तारा योग तारा है । (१८) ज्येष्ठा, श्रवण, अनुराधा और पुष्य नक्षत्रों के बीचवाले तारे प्रत्येक के योग तारे हैं । भरणी, कृत्तिका, मघा और रेवती नक्षत्र के दक्षिणवाला तारा प्रत्येक नक्षत्र का योग तारा है । (१६) रोहिणी, पुनर्वसु, मूल और आश्लेषा नक्षत्र का पूर्ववाला तारा प्रत्येक का योग तारा है । २८ नक्षत्रों में से अब जितने शेष हैं, उनमें