भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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४२ सूर्य सिद्धान्त मासपति—यदि किसी सावन मास का पहला दिन रविवार हो तो अगले सावन मास का पहला दिन रविवार से ३१वाँ दिन होगा क्योंकि सावन मास ३० दिन का होता है । परन्तु रविवार से ३१वां दिन पांचवें सप्ताह का तीसरा दिन मंगलवार होता है । इसलिए दूसरे सावन मास का स्वामी मंगल ग्रह हुआ । तीसरे सावन मास का पहला दिन मंगलवार से ३१वां हुआ अर्थात् मंगलवार से आरम्भ करके पांचवें सप्ताह का तीसरा दिन, वृहस्पतिवार हुआ । इसलिए तीसरे सावन मास का स्वामी वृहस्पति हुआ । इसी प्रकार चौथे सावन मास का स्वामी, वृहस्पति- वार से तीसरे दिन शनिवार का स्वामी शनि और पांचवें सावन मास का स्वामी शनिवार से तीसरे दिन सोमवार का स्वामी सोम तथा छठें सावन मास का स्वामी बुध और सातवें सावन मास का स्वामी शुक्र हुआ । आठवें सावन मास से फिर यह क्रम चलेगा । इसलिए वारों के क्रम से तीसरा वार आने वाले सावन मास का पहला दिन तथा उसका स्वामी उस सावन मास का स्वामी होता है । अब यदि ध्यान से देखा जाय तो जान पड़ेगा कि मासपतियों का क्रम ग्रहों के क्रम के अनुसार इस प्रकार है— रवि, मंगल, वृहस्पति, शनि, सोम, बुध और शुक्र; फिर रवि, मंगल, वृहस्पति शनि इत्यादि । यदि चन्द्रमा से यह चक्र आरंभ हो तो इनका क्रम वही रहेगा जिस क्रम से ये पृथ्वी से क्रमानुसार दूर समझे गये हैं । वर्षपति—सावन वर्ष का आरम्भ जिस दिन से होता है उसी दिन का स्वामी उस वर्ष का स्वामी समझा जाता है । यदि पहले सावन वर्ष का आरम्भ रविवार को हो तो दूसरे सावन वर्ष का आरम्भ रविवार से ३६१वें दिन होगा जो ५१ सप्ताह के बाद वाले सप्ताह का चौथा दिन अर्थात् बुधवार है इसलिए दूसरे सावन वर्ष का स्वामी बुध होगा । तीसरे सावन वर्ष का आरम्भ दूसरे सावन वर्ष से ३६१वें दिन होगा इसलिए यह बुधवार से चौथा दिन शनिवार होगा जिसका स्वामी शनि है इसलिए तीसरे सावन वर्ष का स्वामी शनि होगा । इसी प्रकार चौथे सावन वर्ष का स्वामी शनिवार से चौथे दिन मंगलवार का स्वामी मंगल है । पाँचवें सावन वर्ष का स्वामी, मंगलवार से चौथे दिन शुक्रवार का स्वामी शुक्र है । छठें सावन वर्ष का स्वामी शुक्रवार से चौथे दिन सोमवार का स्वामी सोम, सातवें सावन वर्ष का स्वामी सोमवार से चौथे दिन वृहस्पतिवार का स्वामी वृहस्पति तथा आठवें सावन वर्ष का स्वामी वृहस्पतिवार से चौथे दिन रविवार का स्वामी रवि फिर होगा । इस तरह आठवें सावन वर्ष से फिर वही क्रम आरम्भ होगा । इन स्वामियों का क्रम इस प्रकार हुआ रवि, बुध, शनि, मंगल, शुक्र, सोम, वृहस्पति; फिर रवि, बुध, शनि इत्यादि । इसलिए यदि वारों के अनुसार क्रम मिलाया जाय तो आने वाले सावन वर्ष का

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