भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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मध्यमाधिकार ४३ पहला दिन गत सावन वर्ष के पहले दिन से चौथा होगा । और यदि ग्रहों का क्रम मिलाया जाय तो शनि से आरम्भ करके प्रति तीसरा ग्रह वर्ष का स्वामी होता है । इन बातों को सूत्र रूप में भूगोलाध्याय के ७८वें और ७९वें श्लोकों में यों लिखा गया है :— मन्दादधःक्रमेण स्युश्चतुर्था दिवसाधिपाः । वर्षाधिपतयस्तद्वत्तृतीयाश्च प्रकीर्तिताः ।। ७८ ।। ऊर्ध्वक्रमेण शशिनो मासानामिधिपाः स्मृताः । होरेशाः सूर्यतनयादधोऽधः क्रमशस्तथा ।। ७९ ।। सूर्य सिद्धान्त, भूगोलाध्याय वर्षपति, मासपति, दिनपति और होरापति जानने की दोनों रीतियाँ दो चित्रों (चित्र ५ तथा ६) के द्वारा दिखलायी जाती हैं । वारों के अनुसार क्रम चित्र ५