सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६३८ सूर्य-सिद्धान्त कौन आकाश चित्र किस समय देखना चाहिये। यदि महीने की किसी और तारीख को आकाश-चित्र से काम लेना हो तो यह ध्यान में रखना चाहिये कि जो दृश्य महीने की १ ली तारीख को १० बजे देख पड़ता है वही दृश्य २री तारीख को दस बजने से ४ मिनट पहले, ३री तारीख को दस बजने से ४ x २ = ८ मिनट पहले, एक सप्ताह के बाद अर्थात् ८वीं तारीख को ४ x ७ = २८ मिनट पहले और १५ दिन के बाद १६ तारीख को १५ x ४ = ६० मिनट या १ घंटा पहले अर्थात् ९ बजे देख पड़ेगा। इसका कारण यह है कि पृथ्वी दिन रात भर में १ अंश सूर्य की परिक्रमा करने में आगे बढ़ती है जिससे सूर्य तारों के मध्य पूरब की ओर एक अंश खसकता हुआ देख पड़ता है। इसलिये सूर्य को यामोत्तर वृत्त पर आने में प्रतिदिन ४ मिनट की देर हो जाती है अथवा सूर्य का विषुवांश प्रति दिन प्रायः ४ मिनट बढ़ता जाता है। परन्तु आकाश-चित्र जिस नाक्षत्र-काल का बनाया गया है वह स्थिर है इसलिये मध्याह्न से जितने समय पर आकाश किसी दिन देख पड़ता है उससे ४ मिनट पहले ही दूसरे दिन देख पड़ता है (देखो पृष्ठ ४६३-४६६) । सीधा नियम यह है कि मध्याह्न के सूर्य के विषुवांश से जितना पहले या पीछे आकाश चित्र का नाक्षत्र-काल है मध्याह्न से उतना ही पहले या पीछे आकाश-चित्र में बतलाये गये दृश्य आकाश में देख पड़ते हैं। जैसे वैशाख की १ ली तारीख को मध्याह्नकालीन सूर्य का विषुवांश १ घण्टा २६ मिनट के लगभग होता है और ज्येष्ठ के आकाश चित्र का नाक्षत्रकाल १० घंटा ३० मिनट है अर्थात् मध्याह्नकालीन विषुवांश से १२ घण्टा १ मिनट पीछे है इसलिये वैशाख की १ ली तारीख को ज्येष्ठ का आकाश चित्र रात के १२ बजकर १ मिनट पर देख पड़ेगा। परन्तु ६ठें स्तम्भ में ११ बज कर ५६ मिनट बतलाया गया है इसका कारण यह है। कि १२ घंटा १ मिनट नाक्षत्र-काल में है और ११ घंटा ५६ मिनट धूपघड़ी के अनुसार सावन-काल में है। क्योंकि यह बतलाया जा चुका है कि सावन दिन नाक्षत्र दिन से ४ मिनट के लगभग बड़ा होता है (देखो पृष्ठ ३३७-३६) इसलिये नाक्षत्र-काल का ६ घण्टा सावन-काल के ५ घण्टा ५६ मिनट के समान होता है। इस नियम के अनुसार यदि आप माघ महीने की १ली तारीख को एक ही रात में आकाश के कुल तारों को देखना चाहें तो सहज ही देख सकते हैं। इस तारीख को बम्बई और जगन्नाथ पुरी को मिलाने वाली रेखा के उत्तर के प्रान्तों में अर्थात् सारे उत्तर भारत में सूर्य साढ़े पांच बजे के पहले अस्त होता है। इसलिये ६ बजे संध्या के समय आकाश के तारे अच्छी तरह दिखाई पड़ने लगते हैं। इस तारीख को मध्याह्नकालीन सूर्य का विषुवांश १६ घण्टा ४२ मिनट होता है इसलिये मध्याह्न से