भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार ६४१

दिखाये गये हैं क्षितिज से खस्वस्तिक तक वही तारे उसी क्रम से देख पड़ेंगे। ज्येष्ठ मास का आकाश चित्र— सिर के ऊपर—स्वाती खस्वस्तिक से कुछ पूरब और दक्खिन है। पौन घण्टे में यह यामोत्तर वृत्त पर आ जायगा और उस समय खस्वस्तिक से ५ अंश दक्खिन रहेगा। उत्तर—सप्तर्षि के पहले ५ तारे यामोत्तर वृत्त से पच्छिम हो गये हैं। छठा तारा वशिष्ठ प्रायः यामोत्तर वृत्त पर है। इसी के पास इसका युगल तारा अरुंधती भी ध्यान से देखने पर देख पड़ेगा। सातवाँ तारा मरीचि कुछ पूरब है और १५ मिनट में यामोत्तर वृत्त पर आ जायगा। सप्तर्षि के नीचे ४ मंद तारे पूरब से पच्छिम की ओर प्रायः एक रेखा में फैले हुए देख पड़ते हैं। यह अजगर की पूँछ की तरफ के तारे हैं, जिसका मुँह इस समय उत्तर-पूर्व दिशा में प्रायः उसी ऊँचाई पर देख पड़ता है जिस ऊँचाई पर लघु- सप्तर्षि के तारे उत्तर दिशा में अजगर की लपेट के नीचे देख पड़ते हैं। उत्तर से कुछ पूर्व की ओर सिफियस के तीन तारे क्षितिज के पास ही देख पड़ते हैं। उत्तर-पूरब—इस दिशा में क्षितिज के पास ही हंस मण्डल के तारे देख पड़ते हैं। यहाँ से लेकर पूरब-दक्खिन के कोने तक एक चमकती हुई सड़क सी दिखाई पड़ती है। इसी को आकाश-गंगा कहते हैं। इसमें अनगिनत तारे आरम्भिक दशा में हैं। हंस के ऊपर बहुत ही चमकीला तारा अभिजित है। प्रथम श्रेणी का यह तीसरा तारा है। इसी के बगल में पूरब की ओर अजगर का मुख है। पूरब—क्षितिज के पास ही कुछ उत्तर की ओर हटकर श्रवण नक्षत्र के तीन तारे हैं जिसके बीच का तारा बहुत चमकीला और प्रथम श्रेणी का है। श्रवण के ऊपर खस्वस्तिक और क्षितिज के बीचोबीच हरिकुलेश पुंज है जिसके सभी तारे मन्द ज्योति के हैं। हरिकुलेश पुंज के कुछ ही ऊपर ५, ७ तारे मुकुट के आकार के देख पड़ते हैं। इसके तारे भी मन्द ज्योति के हैं। इसके और ऊपर खस्वस्तिक के पास स्वाती पुंज है जिसका स्वाती नामक तारा प्रथम श्रेणी का चमकीला तारा है रङ्ग में कुछ-कुछ लाल है। पूरब-दक्षिण—इस समय इस दिशा में वृश्चिक राशि के तारे अपनी अपूर्व छटा से आकाश को शोभायमान कर रहे हैं। ऐसा जान पड़ता है मानों एक बड़ा भारी बिच्छू आकाश में लटक रहा है जिसका मुख अनुराधा नक्षत्र के तीन तारों से बना हुआ है और पेट में ज्येष्ठा नक्षत्र के तीन तारे लटक रहे हैं। बीच वाला तारा भी प्रथम श्रेणी का और कुछ-कुछ लाल है। बिच्छू का डंक दक्खिन की ओर फैला हुआ