भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 667, कुल 838 में से

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पृष्ठ 667

६४२ सूर्य-सिद्धान्त है जिसमें बहुत से छोटे-छोटे तारे चमक रहे हैं। क्षितिज के पास ही मूल नक्षत्र के तारे भी पास ही पास देख पड़ते हैं। कुछ पूरब की ओर परन्तु क्षितिज के पास ही पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के तारे देख पड़ते हैं। मूल और पूर्वाषाढ़ के तारे धनुराशि में हैं जो पूरा उदय नहीं हुआ है। पूर्वाषाढ़ के ऊपर चित्र में मङ्गल ग्रह के दो स्थान दिखलाये गये हैं परन्तु अब वह यहाँ नहीं देख पड़ेगा। अनुराधा के ऊपर विशाखा नक्षत्र के दो तारे दहने बायें फैले हुए देख पड़ते हैं। ये बहुत चमकीले नहीं हैं परन्तु बड़े महत्व के हैं। दक्षिण—इस दिशा में क्षितिज के पास ही सेन्टोरी पुंज के दो तीन तारे प्रथम श्रेणी के हैं। ये इतने दक्खिन हैं कि हम काशी, प्रयाग निवासियों को एक घण्टे से अधिक नहीं दिखाई पड़ते। लखनऊ वालों को इससे भी कम समय तक देख पड़ते हैं। अलीगढ़, बरेली वालों को कठिनाई से देख पड़ेंगे और इससे भी उत्तर रहने वालों को नहीं देख पड़ेंगे। कुछ पच्छिम की ओर क्षितिज के पास ही दूसरी श्रेणी के चार तारे पास ही पास देख पड़ते हैं। यह भी एक घण्टे से अधिक नहीं देख पड़ते। खस्वस्तिक और दक्षिण क्षितिज के मध्य से कुछ और ऊपर प्रथम श्रेणी का चित्रा तारा है जो अपनी स्थिति के कारण बड़े महत्व का है। यह प्रायः क्रान्तिवृत्त पर है। आज से कोई सवा सोलह सौ वर्ष पहले शरद सम्पात इसी तारे के पास होता था अर्थात् जब सूर्य यहाँ पहुँचता था तब वह दक्षिण गोल में जाता था। आजकल शरद सम्पात इस तारे से २२ अंश ५० कला के लगभग पच्छिम हो गया है और उस जगह है जहाँ १२ वें नक्षत्र के पास श अक्षर लिखा हुआ है। महाराष्ट्र प्रान्त में इसी तारे के सम्बन्ध में बड़ा वाद-विवाद चल रहा है। जो लोग कहते हैं कि अश्विनी नक्षत्र अथवा मेष राशि का आरम्भ उस बिन्दु से माना जाना चाहिए जिससे चित्रा तारा ठीक १८० अंश दूर है वे लोग चैत्र पक्ष के कहलाते हैं। इस पक्ष के समर्थक आचार्य वेंकटेश बापू जी केतकर तथा अन्यान्य सज्जन हैं। इनके विरुद्ध एक दूसरा पक्ष है जिसके समर्थक लोकमान्य तिलक भी थे। इनका मत है कि अश्विनी का आरम्भ स्थान वह बिन्दु है जिससे चित्रा तारा १८४, अंश के लगभग दूर है। यह विन्दु रेवती नक्षत्र में है (देखो भाद्रपद मास का चित्र) । इसीलिए इस पक्ष को रैवत पक्ष कहते हैं। चित्रा से पच्छिम कुछ नीचे की ओर हस्त नक्षत्र के ५ तारे हाथ की अंगुलियों की तरह फैले हुए देख पड़ते हैं। हस्त के ऊपर कन्या राशि के कई मन्द-मन्द तारे देख पड़ते हैं। नीचे की ओर के दो-तीन तारे जो प्रायः सीधी रेखा में हैं क्रान्तिवृत्त के पास ही प्रायः उसी के समानान्तर देख पड़ते हैं। इस रेखा के पच्छिम सिरे पर

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