भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार ६४३ जो तारा है उसी के पास आजकल शरद सम्पात बिन्दु है, इसलिये जब सूर्य यहां आता है तब वह दक्षिण गोल में जाता है । इसी से चित्रा तारा २३ अंश के लगभग दूर है। दक्षिण पच्छिम—इस दिशा के आकाश में कोई महत्व के तारे नहीं हैं । बहुत मन्द-मन्द तारों की एक वक्र रेखा चित्रा और हस्त नक्षत्रों के नीचे से होती हुई पच्छिम दिशा तक फैली हुई है जिसके पच्छिमी सिरे पर एक तारा कुछ चमकीला है । पच्छिम—क्षितिज के पास प्रश्वा नामक तारा देख पड़ता है । इससे उत्तर की ओर कई मन्द-मन्द तारे एक वक्र रेखा में देख पड़ते हैं जिसके उत्तरी छोर पर दो प्रथम श्रेणी के तारे हैं । यही पुनर्वसु नक्षत्र के दो तारे हैं । प्रश्वा से पुनर्वसु तक मन्द-मन्द तारों की जो वक्र रेखा बन जाती है वह मिथुन राशि है । प्रश्वा के ऊपर बहुत मन्द-मन्द तारों का एक वक्र है जिसे कर्क राशि कहते हैं। यह ठीक पच्छिम की ओर देख पड़ता है । इससे ऊपर कुछ ही पच्छिम की ओर हटकर खस्वस्तिक और क्षितिज के बीचोबीच सिंह राशि के तारे अपनी अपूर्व छटा दिखा रहे हैं। सिंह की गर्दन नीचे की ओर लटकी हुई है जिसमें ६, ७ तारे सहज ही देखे जा सकते हैं जिनका आकार हँसिया की तरह जान पड़ता है। दक्खिन वाला अथवा बायीं ओर वाला तारा कुछ कुछ लाल है और प्रथम श्रेणी का है। इसी को मघा का योग तारा या केवल मघा तारा कहते हैं। यह प्रायः क्रान्तिवृत्त पर है इसलिए बड़े महत्व का है । इससे दाहिने उत्तर की ओर एक और तारा है जो चमक में मघा से कुछ कम है परन्तु इतना चमकीला अवश्य है कि पूर्णमासी की रात में भी देखा जा सकता है ! मघा के ऊपर दो तारे दाहिने बायें चमकते हुए देख पड़ते हैं । ये पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तारे हैं और सिंहराशि की कमर में हैं। सिंह राशि की पूंछ में पूर्वाफाल्गुनी के कुछ और ऊपर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का अकेला तारा है । इस प्रकार यह प्रकट है कि पच्छिम दिशा में दो राशियों के तारे अपनी चमक से सहज ही लोगों को आकर्षित कर सकते हैं; केवल कर्कराशि के तारों को मिथुन और सिंहराशियों के बीच कुछ दक्खिन की ओर ध्यान से देखना पड़ता है । उत्तर पच्छिम — इस दिशा में क्षितिज के पास प्रजापति मण्डल के केवल प्रजापति नाम का तारा देख पड़ता है । ब्रह्महृदय तारा कुछ पहले अस्त हो गया है । इसके सिवा क्षितिज के पास कोई चमकीला तारा अथवा तारासमूह नहीं है । बहुत ऊपर पहले बतलाये हुए सप्तर्षिमण्डल के तारे देख पड़ते हैं । सप्तर्षिमण्डल के दो ध्रुव- सूचक तारों क्रतु और पुलहकी रेखा में दक्खिन की ओर एक तारा है। इससे और दक्खिन परन्तु पूर्वाफाल्गुनी के उत्तर दोनों के बीच में बहुत मन्द-मन्द तारे सर्पाकार