भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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६६४ सूर्य-सिद्धान्त २६ मई को सूर्य की क्रान्ति २१ अंश ३७ कला ३७.६ विकला अथवा २१°३८' है और शुक्र की क्रान्ति १६ अंश १२ कला १६.४ विकला अथवा १६°१२' है। यह जानने के लिए कि सूर्य और शुक्र किस समय क्षितिज पर आवेंगे पहले इनके चरकाल जानना आवश्यक है (देखो चित्र ६० पृष्ठ ३०८)। काशी का अक्षांश २५°२०' है। उदयकालिक सूर्य की चरज्या = स्परे २१°३८' X स्परे २५°२०' = .३९६६ X .४७३७ = .१८७६ ∴ चरांश = १०°५०' ∵ चरकाल = ४३ मिनट २० सेकंड सूर्य की क्रान्ति उत्तर है इसलिए सूर्य के विषुवांश से यह चरकाल घटाने पर यह ज्ञात होगा कि सूर्योदय के समय विषुवद्वृत्त का कौन सा विन्दु पूर्व में लग्न है (देखो चित्र ६०)। घं० मि० से० सूर्य का विषुवांश ४ २४ १७ चरकाल ४३ २० अन्तर ३ ४० ५७ इसलिए सूर्योदय काल में विषुवद्वृत्त का वह विन्दु पूर्व में लग्न है जो वसंत सम्पात से ३ घण्टा ४० मि० ५७ सेकंड या ३ घण्टा ४१ मिनट आगे है। उदयकालिक शुक्र की चरज्या = स्परे १६°१२' X स्परे २५°२०' = .३४८२ X .४७३७ = .१६४६ ∵ चरांश = ६°३०' ∴ चरकाल = ३८ मिनट घं० मि० शुक्र का विषुवांश ३ ४७ चरकाल ३८ अंतर ३ ६ इसलिए शुक्र जिस समय पूर्व क्षितिज पर आवेगा उस समय विषुवद्वृत्त का वह विन्दु पूर्व में लग्न होगा जो वसंत सम्पात से ३ घण्टा ६ मिनट आगे है।