भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 696, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 696

उदयास्ताधिकार ६७१ $= \frac{- \cdot ३०६}{\cdot ६०४०}$ $= - \cdot ३४१८$ $\because$ कोज्या नतकाल $=$ कोज्या ($६० +$ अ) $= -$ ज्या अ $= - \cdot ३४१८$ $\because$ अ $= १६^\circ ५६'$ $\because$ संधिप्रकाश के आरम्भ का नतकाल $= ६० + १६^\circ ५६'$ $= १०६^\circ ५६'$ पृष्ठ ३८० के अनुसार सूर्योदय का नतकाल ६०$^\circ$३८'$\cdot$७ या ६०$^\circ$३६' है । इसलिए संधिप्रकाशकाल $= १०६^\circ ५६' - ६०^\circ ३६' = १६^\circ २०'$ $= १$ घंटा १७ मिनट २० सेकंड इस प्रकार यह सिद्ध है कि किसी स्थान पर संधिप्रकाश काल सब ऋतुओं में एकसा नहीं होता । ऊपर जो गणना की गयी है उसमें सूर्य उस समय क्षितिज पर समझा गया है जिस समय सूर्य का केन्द्र क्षितिज पर आता है परन्तु सूर्य का ऊपरी बिम्ब १ मिनट के लगभग पहले ही क्षितिज को छू लेता है क्योंकि सूर्य का बिम्बार्ध १६ कला के लगभग होता है । इस कारण संधि प्रकाश काल १ मिनट और कम हो जाता है । उदयास्तकाल के कितने दिन बीते हैं या शेष हैं— तत्कालांशान्तरकला भुक्त्यन्तर विभाजिताः । दिनादितत्फलं लब्धैर्भुक्तियोगेन वक्रिणः ॥१०॥ यल्लग्नासुहृते भुक्तौ अष्टादश शतोद्धृते । स्यातां कालगतीताभ्यां दिनादि गत गम्ययोः ॥११॥ अनुवाद—(१०) ग्रह के इष्टकालिक कालांश और परमकालांश के अंतर को कलाओं में लिखकर सूर्य और ग्रह की दैनिक कालगतियों के अन्तर से (यदि ग्रह मार्गी हो ) और योग से ( यदि ग्रह वक्री हो ) भाग देने से जो आता है वह दिनों की संख्या है । (११) सूर्य या ग्रह जिस राशि में हो उसके लग्नासुओं को स्पष्ट दैनिक गति से गुणा करके गुणनफल को १८०० से भाग देने पर जो प्राप्त होता है वही ग्रह की कालगति होती है । सूर्य और ग्रह की कालगतियों ( के अन्तर या योग ) से ही उदय या अस्तकाल के गत या गम्य दिन जाने जाते हैं । विज्ञान भाष्य—यदि किसी दिन यह जानना हो कि किसी ग्रह के उदय

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक) · पृष्ठ 696, कुल 838 में से · BharatKosha