भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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मध्यमाधिकार ४७ यदि 'स' को महायुगीय सावन दिन, 'अ' को इष्ट अहर्गण, 'भ' को महायुगीय भगण तथा 'भा' को अभीष्ट भगण माना जाय तो संक्षेप में इसको यों लिखेंगे :- भा = (अ × भ) / स यह एक भिन्न है, जिसको सरल किया जाय तो जो पूर्णाङ्क आवेगा वह ग्रह के उन भगणों की संख्या है जो उस समय तक पूरे हो चुके हैं और शेष भिन्न को १२ से गुणा करके सरल करने पर जो पूर्णाङ्क आवेगा वह गत राशि तथा फिर जो भिन्न होगी उसको ३० से गुणा करके सरल करने पर वर्तमान राशि के अंश निकलेंगे । यदि कला विकला भी जानना हो तो ६० से गुणा करके सरल करते जाना होगा । यह नियम सभी पूर्व चलने वाले ग्रहों, शीघ्रोच्चों और मन्दोच्चों के लिए लागू है। यदि किसी ग्रह के पातों का स्थान जानना हो तो ऊपर लिखी रीति से जो राशि, अंश, कला, विकला आवे उसे १२ राशियों में से घटा देना चाहिये क्योंकि पात की चाल उलटी होती है इसलिए वह उलटे क्रम से राशि चक्र पर चलेगा । यदि गणित से निकले कि अमुक पात 'भा' भगण पूरे करके २ राशि ३ अंश ५ कला पर है, तो इसे मेष के आदि बिन्दु से उलटा गिनना चाहिये अर्थात् मीन, कुंभ, और मकर के अंतिम बिंदु से ३ अंश ५ कला अर्थात् मकर के २६ अंश ५५ कला पर । इसलिए यदि १२ राशियों में २ राशि ३ अंश ५ कला घटाया जाय तो ९ राशि २६ अंश ५५ कला आवेगा जिसका अर्थ यह हुआ कि वह पात राशि चक्र की ९ राशियों के उपरान्त दसवीं राशि के २६ अंश ५५ कला पर है। द्वादशघ्ना गुरोर्याता भगणा वर्तमानकैः । राशिभिस्सहिताश्शुद्धाष्षष्ट्या स्युर्विजयादयः ॥५५॥ अनुवाद—बृहस्पति के गत भगणों को १२ से गुणा करके गुणनफल में वर्तमान भगण की जिस राशि में बृहस्पति हो उसकी क्रम संख्या को जोड़ दे, योगफल को ६० से भाग देने पर जो शेष बचे उसी क्रम संख्या का सम्वत्सर विजय से आरंभ होकर चल रहा है, ऐसा समझना चाहिये ॥ ५५ ॥ विज्ञान भाष्य—बृहस्पति मध्यम गति से जितने समय में एक राशि चलता है उसको सम्वत्सर कहते हैं। इसलिए वृहस्पति के एक भगण काल में (४३३२·३२०६ सावन दिनों में) बारह सम्वत्सर होते हैं और एक सम्वत्सर में ३६१·०२६७२ सावन दिन होते हैं। इसलिए यह स्पष्ट है कि सौर वर्ष की अपेक्षा संवत्सर ४·२३२०३ सावन दिन छोटा और सावन वर्ष से १·०२६७२ सावन दिन बड़ा होता है।