भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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शृङ्गोन्नत्यधिकार ६८५ गति दैनिक गति के समान होती है तो लग्नान्तरासुओं में इसी के अनुपात से होगी । यह गति जान लेने पर इसे सूर्यास्तकालिक सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश में जोड़कर और योगफल में ६ राशि और जोड़कर इनके लग्नों के अन्तरासु फिर निकाले । इस प्रकार २, ३ बार असकृत्कर्म करने से जब अन्तर स्थिर हो जाय तब सूर्यास्त से उतने ही समय उपरान्त चन्द्रमा का अस्त होता है । यहाँ एक बात विचारणीय है । जब सूर्यास्तकाल के सूर्य और चन्द्रमा एक बार स्पष्ट कर लिये गये और पहली बार यह मालूम कर लिया गया कि सूर्यास्त काल से इतने समय उपरान्त चन्द्रमा का अस्त होगा तब इसमें और चन्द्रमा के प्रत्यक्ष अस्तकाल में जो अन्तर पड़ेगा वह केवल चन्द्रमा की गति के कारण होगा इसलिए असकृत्कर्म के लिए केवल चन्द्रमा की गति को सूर्यास्तकालिक चन्द्रमा के भोगांश में जोड़ना चाहिए न कि सूर्य की गति को भी । परन्तु नियम में सूर्य और चन्द्रमा दोनों की गतियों को जोड़ने को कहा गया है । सूर्य की गति को भी जोड़ने से जो समय आवेगा वह नाक्षत्र-काल नहीं होगा वरन् सावन काल होगा । परन्तु पहला अन्तर नाक्षत्र काल में आता है इसलिए नाक्षत्र काल और सावन काल का योग नहीं हो सकता । इसलिए उचित यह है कि केवल चन्द्रमा की गति का असकृत्कर्म किया जाय परन्तु सूर्य की गति लेने से अधिक से अधिक अन्तर २ मिनट का हो सकता है क्योंकि १२ घण्टे का नाक्षत्र काल १२ घण्टे के सावन काल से केवल २ मिनट अधिक होता है । इसलिए इतनी भूल के लिए नियम को ही प्रक्षिप्त समझ कर निकाल देना बुद्धिमानी नहीं जान पड़ती । कृष्ण पक्ष में चन्द्रमा का उदय काल जानना — भगणार्धं रवौ दत्वा कार्यास्तद्विवरासवः । तैः प्राणैः कृष्णपक्षे तु शीतांशुरुदयं व्रजेत ॥५॥ अनुवाद—(५) सूर्यास्तकालिक सूर्य के भोगांश में ६ राशि जोड़ने से जो आवे उसके लग्नकाल और सूर्यास्तकालिक स्पष्ट चन्द्रमा के लग्नकाल के अन्तरासुओं से असकृत्कर्म के द्वारा जो समय आता है सूर्यास्त से उतने ही समय उपरान्त कृष्ण पक्ष में चन्द्रमा का पूर्व क्षितिज में उदय होता है । विज्ञान-भाष्य —कृष्ण पक्ष में चन्द्रमा का भोगांश सूर्यास्तकालिक सूर्य के भोगांश से १८० अंश से अधिक होता है इसलिए सूर्यास्त के उपरान्त पूर्व क्षितिज में चन्द्रमा का उदय होता है । यह जानने के लिए सूर्यास्त काल के सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश जानकर केवल सूर्य के भोगांश में ६ राशि जोड़ना चाहिए क्योंकि चन्द्रमा का