भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 713, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 713

६८८ सूर्य-सिद्धान्त या उत्तर दिशा समझनी चाहिए और चन्द्रमा के भुज कोटि और कर्ण को भी यामोत्तरवृत्त के तल में समझना चाहिए। यह सब बातें * चित्र ११५ से अच्छी तरह समझ में आ जायगी । चित्र ११५ प = क्षितिज का पच्छिम विन्दु द = " का दक्षिण विन्दु पद = पच्छिम विन्दु से दक्षिण बिन्दु तक का क्षितिज का चतुर्थांश ख = खस्वस्तिक र रि = सूर्य के अहोरात्र वृत्त का खंड जो यामोत्तर वृत्त और पच्छिम क्षितिज के बीच में है जब कि सूर्य की क्रान्ति उत्तर होती है । रा री = सूर्य के अहोरात्रवृत्त का खंड जब क्रान्ति दक्षिण हो । रि, री = पच्छिम क्षितिज के विन्दु जहाँ सूर्य अस्त होता है । च चा = चन्द्रमा के अहोरात्र वृत्त का खंड जो यामोत्तर वृत्त और पच्छिम क्षितिज के बीच में है । विप = विषुवद्वृत्त का चतुर्थांश जो यामोत्तरवृत्त और क्षितिज के बीच है ।

  • यह चित्र स्वामी विज्ञानानन्द के बङ्गला सूर्य-सिद्धान्त से लिया गया है।
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक) · पृष्ठ 713, कुल 838 में से · BharatKosha