भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 725

७०० सूर्य-सिद्धान्त गोलीय त्रिकोणमिति के सूत्र के अनुसार, कोज्या च र = कोज्या ख र × कोज्या ख च + ज्या ख र × ज्या ख च × कोज्या ∠ र ख च इस सूत्र से जब च र आ जाय तब, कोज्या ∠ ख च र = कोज्या ख र - कोज्या ख च × कोज्या च र / ज्या ख च × ज्या च र कोण ख च र को १८० अंश से घटाने पर जो कोण आवेगा वही शृङ्गोन्नति वा कोण होगा क्योंकि यह ∠ छ च र के समान है। यदि चन्द्रमा से सूर्य उत्तर होगा तो उत्तर शृङ्ग उन्नत होगा और दक्षिण होगा तो दक्षिण शृङ्ग उन्नत रहेगा। यदि सूर्य और चन्द्रमा दोनों के दिगंश एक होंगे तो शृङ्ग सम होगा। इतना जान लेने पर चन्द्रमा के शृङ्गोन्नति का परिलेख इस प्रकार खींचना चाहिए जैसा चित्र ११६ से प्रकट होता है। यह स्पष्ट है कि सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार सूर्य और चन्द्रमा को स्पष्ट करने से शृङ्गोन्नति की गणना ठीक नहीं हो सकती क्योंकि सूर्य-सिद्धान्त के ध्रुवाङ्कों में कुछ स्थूलता आ गयी है। इसलिए उचित है कि ग्रहों के ध्रुवाङ्क शुद्ध वेध द्वारा फिर से स्थिर किये जायँ। इस प्रकार शृङ्गोन्नत्यधिकार नामक दसवें अध्याय का विज्ञान-भाष्य समाप्त हुआ।