भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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शृङ्गोन्नत्यधिकार ६६६ मालूम हो सकता है। यदि सूर्य और चन्द्रमा के विषुवांश और क्रान्ति मालूम हों तो विषुवांश से विषुव काल और नतकाल जाने जा सकते हैं और नतकाल, क्रान्ति तथा अक्षांश से पृष्ठ २६१ के सूत्र (१) के नतांश और इससे पृष्ठ २७३ में दिये हुए सूत्र से दिगंश जाने जा सकते हैं। चित्र ११८ से विदित होता है कि इनके आधार पर शृङ्गोन्नति कैसे जानी-जा सकती है। चित्र ११८ च = चन्द्र बिम्ब का केन्द्र उ च = चन्द्र केन्द्र का ऊर्ध्व वृत्त (दृङ्मण्डल) र च = सूर्य की दिशा क ख ग घ = चन्द्रमा का शुक्ल भाग ∠ उ च र = शृङ्गोन्नति का कोण = ∠ क च प