भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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६६८ सूर्य-सिद्धान्त राशि से चन्द्रमा की राशि घटाकर शुक्ल भाग की गणना की जाय और परिक्षेख बनाया जाय तो अधिक अच्छा है । अब संक्षेप में यह बतला देना उचित होगा कि शुद्ध गणित की रीति से शृङ्गोन्नति की गणना कैसे की जाती है । शृङ्गोन्नति की गणना की नवीन रीति— सूर्य और चन्द्र बिम्बों के केन्द्रों से जानेवाले महावृत्त से चन्द्रशृङ्गों को मिलानेवाली रेखा समकोण बनाती है । खमध्य और चन्द्र बिम्ब के केन्द्र से जाने वाला महावृत्त अर्थात् दृङ्मण्डल पहले महावृत्त से जो कोण बनाता है वही शृङ्गोन्नति के कोण के समान होता है इसलिए शृङ्गोन्नति जानने के लिए इसी कोण के जानने की आवश्यकता होती है जो गोलीय त्रिकोणमिति के एक सूत्र के अनुसार जिसकी चर्चा त्रिप्रश्नाधिकार में कई स्थानों पर की गयी है सहज ही चित्र ११८ उ ख द == यामोत्तर वृत्त ख = खमध्य ज = देखने वाले का स्थान उ ज द = उत्तर-दक्षिण रेखा उ प द = पच्छिम क्षितिज च = पच्छिम गोल में चन्द्रमा का स्थान र = अस्त हुए सूर्य का स्थान ख च = चन्द्रमा का नतांश ख र = सूर्य का नतांश च र = सूर्य और चन्द्रमा के बीच का अन्तर ∠ र ख च = सूर्य और चन्द्रमा के दिगंशों का अन्तर