भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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७२६ सूर्य-सिद्धान्त अर्वाचीन ज्योतिष के अनुसार स्थिर नहीं की जा सकती क्योंकि सब तारे समान दूरी पर नहीं हैं। आकाश कक्षा की सीमा भी स्थिर नहीं की जा सकती क्योंकि आजकल कुछ तारों की दूरी इतनी अधिक समझी जाती है कि आकाश कक्षा की सीमा उसके सामने नगण्य है। चित्र १२१ तथा १२२ से हिन्दू ज्योतिष और अर्वाचीन ज्योतिष के मतों की भिन्नता अच्छी तरह समझ में आ जायगी । पृथ्वी और चन्द्रकक्षा के बीच में मेघों, विद्याधरों और सिद्धों के लोक हैं जो इस चित्र में नहीं दिखलाये जा सके ।

ने यु श गु मं भू शु बु सू

चित्र १२२ अर्वाचीन ज्योतिष के अनुसार ग्रह की कक्षाओं का क्रम (यहाँ सूर्य केन्द्र में है)