सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७२८ सूर्य-सिद्धान्त विज्ञान भाष्य—भूगोल के भीतर सात पाताल देश माने गये हैं जिनके नाम अतल, वितल, सुतल, रसातल, तलातल, महातल और पाताल हैं। यहां नागों और असुरों का निवास है। सुमेरु पर्वत के पास जम्बू नदी है। यह पर्वत भूगोल के केन्द्र से होता हुआ दोनों ओर अर्थात् उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर निकला हुआ माना गया है। उत्तरी ध्रुव पर देवता और दक्षिणी ध्रुव पर असुर रहते हैं जो परस्पर शत्रु हैं। इस मेरु पर्वत को घेरे हुए पृथिवी के चारों ओर लवण समुद्र है जो देवताओं और असुरों की भूमि को अलग करता है और पृथिवी की मेखला की तरह है। इस वर्णन में बहुत सी बातें कल्पना से उत्पन्न हुई जान पड़ती हैं इसलिये इन सब का अस्तित्व नहीं बतलाया जा सकता। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को सुमेरु पर्वत के ऊपर और नीचे वाले सिरे समझना चाहिये। इसके बीच में विषुवत् रेखा के पास लवण समुद्र माना गया है जो आजकल भी प्रायः इसी स्थिति में है। विषुवत् रेखा पर स्थित चार नगरियों का वर्णन : समन्तान्मेरुमध्यात् तुल्यभागेषु तोयधेः । द्वीपेषु दिक्षु पूर्वादिन्दर्गयो देवनिर्मिताः ॥३७॥ भूवृत्तपादे पूर्वस्यां यमकोटीति विश्रुता । भद्राश्ववर्षे नगरी स्वर्णप्राकारतोरणा ॥३८॥ याम्यायां भारते वर्षे लंका तद्वन्महापुरी । पश्चिमे केतुमालाख्ये रोमकख्या प्रकीर्तिता ॥३६॥ उदक्सिद्धपुरी नाम कुरुवर्षे प्रतिष्ठिता । तस्यां सिद्धा महात्मानो निवसन्ति गतव्यथाः ॥४०॥ भूवृत्तपादविवराः ताश्चान्योन्यं प्रतिष्ठिताः । ताभ्यश्चोत्तरतो मेरुः तावानेवासुराश्रयः ॥४१॥ तासामुपरिगो याति विषुवस्थो दिवाकरः । न तासु विषुवच्छाया नाक्षस्योन्नतिरिष्यते ॥४२॥ अनुवाद—(३७) मेरु के मध्य भाग के चारों ओर समुद्र के समान अन्तर पर जम्बू द्वीप के पूर्व दक्षिण, और उत्तर दिशाओं में देवताओं की बनाई हुई चार नगरी हैं। (३८) पूर्व में भूपरिधि के चतुर्थांश पर भद्राश्व वर्ष में यमकोटी नगरी प्रसिद्ध है जहां सोने के दीवार और फाटक हैं; (३६) दक्षिण में भारतवर्ष में उसी प्रकार लङ्कापुरी और पश्चिम में केतुमाल देश में रोमकपुरी प्रसिद्ध हैं; (४०) उत्तर में कुरु देश में सिद्धपुरी है जहाँ सब प्रकार के दुःखों से मुक्त सिद्ध, महात्मा लोग रहते