सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 756, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूगोलाध्याय ७३१ लम्बांश ९०° तथा उत्तरी दक्षिणी ध्रुवों पर अक्षांश ९० और लम्बांश शून्य कैसे होता है (देखो पृष्ठ ५८, ५९, २४६, २५७ इत्यादि) । श्लोक ४५ बड़े महत्व का है। इसमें बतलाया गया है कि जब सूर्य मेष राशि के आदि में होता है तब देवताओं को पहले पहल देख पड़ता है अर्थात् तब उत्तरी ध्रुव निवासियों के लिए सूर्य का उदय होता है और जब वह तुला राशि के आदि में होता है तब असुरों को पहले पहल देख पड़ता है अर्थात् तब दक्षिणी ध्रुव निवासियों के लिए उसका उदय होता है । इससे प्रकट होता है कि मेष राशि का आदि स्थान उसे ही समझना चाहिए जहां क्रान्तिवृत्त और विषुवन्मण्डल का योग होता है और जहां पहुँचकर सूर्य उत्तर गोल में हो जाता है। इसी स्थान को वसंत-संपात- बिन्दु कहते हैं । इसी प्रकार तुला का आदि बिन्दु शरद-सम्पात-बिन्दु है जहाँ पहुँच कर सूर्य दक्षिण गोल में हो जाता है। जब सूर्य मेष के आदि में विषुवन्मंडल पर आता है तभी उत्तरी ध्रुव वालों के लिए सूर्योदय होता है और इससे ६ महीने तक बराबर सूर्य देख पड़ता है। इसी समय को देवताओं का दिन कहते हैं। और असुरों की रात क्योंकि जब तक सूर्य उत्तर ध्रुव वालों को देख पड़ता है तब तक वह दक्षिण ध्रुव वालों के लिए अदृश्य रहता है और वहां रात रहती है । जिस समय सूर्य तुला राशि के आदि में पहुँचता है उस समय उत्तरी ध्रुव पर सूर्यास्त और दक्षिणी ध्रुव पर सूर्योदय होता है इस समय से ६ महीने तक सूर्य दक्षिण ध्रुव पर बराबर देख पड़ता है और वहाँ महीने का दिन होता है। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों तथा विषुवत् रेखा पर यह विशेषताएँ इसीलिए होती हैं कि ध्रुव विषुवत् रेखा से ९० अंश के अन्तर पर है (देखो पृष्ठ ६२) । सूर्य की किरणें मन्द और तीव्र क्यों होती हैं ? अत्यासन्नतया तेन ग्रीष्मे तीव्रकरा रवेः । देवभागे सुराणां तु हेमन्ते मन्दतान्यथा ॥४६॥ अनुवाद—जब सूर्य देव भाग में अर्थात् उत्तर गोल में रहता है तब देवताओं के बहुत निकट होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में उसकी किरणें बड़ी तीव्र होती हैं और हेमन्त ऋतु में दूर होने के कारण मन्द होती हैं । विज्ञान-भाष्य—इस श्लोक में बतलाया गया है कि ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की किरणें इसलिए तीव्र होती हैं कि सूर्य निकट होता है और हेमन्त ऋतु में इसलिए मन्द होती हैं कि सूर्य दूर रहता है परन्तु यह ठीक नहीं है। आजकल यथार्थ में ग्रीष्म ऋतु में सूर्य पृथ्वी से दूर होता है और हेमन्त ऋतु में निकट जैसा कि उसके बिम्बों के आकार से जान पड़ता है (देखो पृष्ठ ८५) । यथार्थ कारण यह है